उत्तर प्रदेशलखनऊ

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़! सबूत मांगने वाले श्रद्धालुओं को दान लौटा सकता है ट्रस्ट, प्रस्ताव पर चल रहा विचार

अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। जिन श्रद्धालुओं ने दान की गई वस्तुओं की रसीद न मिलने या उनके सुरक्षित न होने को लेकर सवाल उठाए हैं, उनके समर्पित दान को लौटाने के प्रस्ताव पर ट्रस्ट गंभीरता से विचार कर रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर के गर्भगृह में सीमित स्थान होने के कारण सभी दान की गई वस्तुओं को स्थायी रूप से प्रदर्शित करना संभव नहीं है। आवश्यकतानुसार उपयोग के बाद इन वस्तुओं को दोबारा सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाता है।

धातुओं की जांच के बाद ही तय होती है रसीद

ट्रस्ट के अनुसार, सोना, चांदी या अन्य धातुओं से बनी वस्तुओं की शुद्धता का परीक्षण किए बिना उनकी रसीद जारी नहीं की जा सकती। जांच पूरी होने के बाद ही धातु की वास्तविक मात्रा तय होती है और उसी आधार पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रसीद जारी की जाती है।

इन बहुमूल्य वस्तुओं को लेकर उठे थे सवाल

चढ़ावा चोरी के आरोप सामने आने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से कुछ दानदाताओं ने अपने समर्पण को लेकर सवाल उठाए थे। इनमें पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायण द्वारा समर्पित स्वर्ण मंडित श्रीरामचरितमानस, सिंधी समाज की ओर से दी गई 200 किलोग्राम चांदी की ईंटें, सराफा कारोबारियों द्वारा दान की गई लगभग 60 किलोग्राम चांदी, चांदी का कागभुसुंडि, बहुमूल्य हार और चांदी की पादुका जैसी वस्तुओं का उल्लेख किया गया था।

ट्रस्ट ने 6 जुलाई को इन बहुमूल्य दान की जानकारी सार्वजनिक करते हुए संबंधित वस्तुओं को मीडिया के सामने भी प्रस्तुत किया था। इसके अलावा चांदी की सिल्लियों को गलाकर सुरक्षित रखने से जुड़ी प्रक्रिया का भी विवरण साझा किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा चढ़ावा विवाद

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण और ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज से जुड़े मामलों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में तीन अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

एक याचिका में चढ़ावा चोरी की केंद्रीय जांच ब्यूरो से जांच कराने और ट्रस्ट के वित्तीय मामलों का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से ऑडिट कराने की मांग की गई है।

दूसरी याचिका में केंद्रीय जांच ब्यूरो के नेतृत्व में विशेषज्ञों की विशेष जांच टीम गठित कर ट्रस्ट के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों की जांच कराने का अनुरोध किया गया है।

वहीं तीसरी याचिका में ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन का फोरेंसिक ऑडिट कराने तथा केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट को प्रभावी निगरानी एवं ऑडिट व्यवस्था लागू करने के निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।