झारखंड

झारखंड सरकार की बड़ी योजना, बकरा पालन पर मिलेगा 70% अनुदान; 100 बकरी-5 बकरों की यूनिट के लिए 6.84 लाख की सब्सिडी

बोकारो: झारखंड सरकार मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत व्यावसायिक बकरा पालन को बढ़ावा दे रही है। योजना के अंतर्गत 100 बकरी और 5 बकरों की इकाई स्थापित करने पर सरकार 70 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को 6.84 लाख रुपये की सब्सिडी मिलेगी। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं, शिक्षित बेरोजगारों और पशुपालकों को स्वरोजगार से जोड़ना और पशुपालन को लाभदायक व्यवसाय के रूप में विकसित करना है।

9.78 लाख की परियोजना पर मिलेगा 6.84 लाख रुपये का अनुदान

योजना के तहत 9.78 लाख रुपये लागत वाली परियोजना पर सरकार 70 प्रतिशत यानी 6,84,600 रुपये का अनुदान देगी। शेष 30 प्रतिशत यानी 2,93,400 रुपये की राशि लाभार्थी को स्वयं या बैंक ऋण के माध्यम से वहन करनी होगी।

दो चरणों में जारी होगी अनुदान राशि

योजना स्वीकृत होने के बाद अनुदान की राशि दो किस्तों में दी जाएगी। पहली किस्त के रूप में कुल अनुदान का 40 प्रतिशत जारी किया जाएगा। इसके बाद फार्म का आधारभूत ढांचा तैयार होने और सत्यापन पूरा होने पर शेष 60 प्रतिशत राशि लाभार्थी को प्रदान की जाएगी।

इस तरह कर सकते हैं आवेदन

इच्छुक आवेदकों को अपने संबंधित प्रखंड के पशुपालन पदाधिकारी से अनुशंसा प्राप्त करने के बाद जिला पशुपालन पदाधिकारी कार्यालय में आवेदन जमा करना होगा। आवेदन की जांच के बाद चयनित लाभार्थियों की सूची जिला पशुपालन कार्यालय के नोटिस बोर्ड और अन्य आधिकारिक माध्यमों से प्रकाशित की जाएगी।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज

आवेदकों को आवेदन पत्र, पासपोर्ट आकार का फोटो, आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, भूमि संबंधी दस्तावेज, बैंक अंशदान प्रमाण पत्र या बैंक बैलेंस विवरण, ऋण स्वीकृति पत्र, प्रशिक्षण प्रमाण पत्र (यदि उपलब्ध हो), परियोजना प्रतिवेदन, स्व-घोषणा पत्र, शपथ-पत्र तथा समूहों के लिए पंजीकरण और बैंक संबंधी दस्तावेज जमा करने होंगे।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ

योजना का लाभ केवल झारखंड के स्थायी निवासी ही ले सकेंगे। आवेदक के पास बकरी पालन का पूर्व अनुभव होना चाहिए। इसके अलावा कम से कम आधा एकड़ स्वयं की भूमि या 10 वर्ष की लीज पर भूमि होना आवश्यक है। कुल परियोजना लागत में न्यूनतम 15 प्रतिशत राशि स्वयं निवेश करनी होगी। प्रशिक्षण प्राप्त आवेदकों, स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही लाभार्थी को कम से कम 10 वर्ष तक परियोजना संचालित करने का शपथ-पत्र देना होगा। इस योजना का पहले लाभ ले चुके व्यक्ति दोबारा पात्र नहीं होंगे।

स्थानीय स्तर पर बढ़ेगा रोजगार और उत्पादन

जिला पशुपालन विभाग के अनुसार बोकारो में बकरों की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में जिले की आवश्यकता पूरी करने के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार और अन्य राज्यों से हर सप्ताह करीब पांच ट्रक बकरों की आपूर्ति की जाती है। स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर बकरा पालन शुरू होने से न केवल किसानों और युवाओं की आय बढ़ेगी, बल्कि बाहरी राज्यों पर निर्भरता भी कम होगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।