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बंगाल में सिर्फ अभिषेक बनर्जी नहीं, पिछले 10 सालों में इन बड़े BJP नेताओं पर भी हुए भयंकर हमले

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा कोई नई बात नहीं है। राज्य में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच का टकराव अक्सर सड़कों पर लहूलुहान करने वाली घटनाओं में बदल जाता है। शनिवार को सोनारपुर में टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के काफिले पर हुए हमले ने भले ही देशव्यापी ध्यान खींचा हो, लेकिन बीजेपी का आरोप है कि पिछले एक दशक में उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर राज्य स्तर के दर्जनों शीर्ष नेताओं को टीएमसी के राज में भारी हिंसा का सामना करना पड़ा है।

पिछले 10 वर्षों (2016-2026) की उन बड़ी घटनाओं पर, जब बीजेपी के दिग्गज नेता बंगाल की धरती पर हिंसक हमलों का शिकार हुए:-

साल 2020: जेपी नड्डा (तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष, BJP) के काफिले पर हमला
पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में यह सबसे बड़े हमलों में से एक माना जाता है।

क्या हुआ था: दिसंबर 2020 में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का काफिला कोलकाता से डायमंड हार्बर (अभिषेक बनर्जी का संसदीय क्षेत्र) जा रहा था।

हमला: डायमंड हार्बर के पास लाठी-डंडों से लैस भीड़ ने उनके काफिले को घेर लिया। गाड़ियों पर भारी पथराव किया गया। जेपी नड्डा की कार बुलेटप्रूफ होने के कारण वह सुरक्षित रहे, लेकिन उनके साथ चल रहे तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनकी गाड़ी के शीशे पूरी तरह चकनाचूर हो गए थे। बीजेपी ने इसका सीधा आरोप टीएमसी के गुंडों पर लगाया था।

साल 2020 और 2023: दिलीप घोष (पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, BJP) पर बार-बार हमले
बंगाल बीजेपी के सबसे आक्रामक चेहरों में से एक दिलीप घोष पर पिछले दस सालों में सबसे ज्यादा बार हमले होने के रिकॉर्ड हैं।

नवंबर 2020 (अलीपुरद्वार): दिलीप घोष के ‘चाय पर चर्चा’ कार्यक्रम के दौरान उनके काफिले पर ताबड़तोड़ पथराव हुआ। उनकी गाड़ियों की खिड़कियां तोड़ दी गईं और उन्हें बमुश्किल सुरक्षा घेरे में निकाला गया।

अप्रैल 2023 (हुगली): हुगली में रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान दिलीप घोष की मौजूदगी में भारी पथराव और आगजनी हुई थी, जिसमें वे बाल-बाल बचे थे।

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साल 2021: शुभेंदु अधिकारी (नंदीग्राम और नेता प्रतिपक्ष) पर हमला
ममता बनर्जी को नंदीग्राम विधानसभा सीट पर मात देने वाले शुभेंदु अधिकारी टीएमसी के निशाने पर हमेशा से रहे हैं।

मई 2021 (नंदीग्राम): चुनाव नतीजे आने के ठीक बाद शुभेंदु अधिकारी जब नंदीग्राम के एक काउंटिंग सेंटर से निकल रहे थे, तब उनके काफिले पर हिंसक भीड़ ने हमला कर दिया। उनकी गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई। शुभेंदु ने आरोप लगाया था कि टीएमसी के लोग चुनाव हारने की हताशा में उनकी जान लेना चाहते थे।

साल 2021: केंद्रीय मंत्री वी. मुरलीधरन पर हमला
बंगाल की हिंसा का शिकार देश के केंद्रीय मंत्रियों को भी होना पड़ा है।

मई 2021 (पश्चिमी मेदिनीपुर): विधानसभा चुनाव के बाद हो रही हिंसा का जायजा लेने पहुंचे तत्कालीन केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन के काफिले पर सरेआम हमला हुआ। भीड़ ने लाठियों और पत्थरों से उनकी गाड़ी के शीशे तोड़ दिए। केंद्रीय मंत्री को अपनी जान बचाने के लिए गाड़ी को पीछे मोड़कर वहां से भागना पड़ा था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था।

साल 2018: रूपा गांगुली और लॉकेट चटर्जी पर हमले
बीजेपी की महिला नेताओं और पूर्व अभिनेत्रियों को भी बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा का सामना करना पड़ा।

2018 (दक्षिण 24 परगना): पंचायत चुनाव के दौरान रूपा गांगुली के काफिले पर हमला हुआ था, जिसमें वह चोटिल हुई थीं। वहीं लॉकेट चटर्जी की गाड़ी को भी कई बार हुगली और अन्य इलाकों में टीएमसी कार्यकर्ताओं द्वारा घेरे जाने और तोड़फोड़ करने की घटनाएं सामने आईं।

राजनीतिक मायने: “जो बोया, वो पाया” बनाम “लोकतंत्र की हत्या”
बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि टीएमसी ने पिछले 10 सालों में बंगाल के भीतर विपक्ष की आवाज को पूरी तरह कुचलने के लिए हिंसक राजनीति का सहारा लिया है। बीजेपी का दावा है कि उनके 200 से अधिक कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हत्याएं की जा चुकी हैं।

दूसरी तरफ, हाल ही में अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में हिंसा का जो चक्र (Cycle of Violence) सालों पहले शुरू हुआ था, वह अब थमने का नाम नहीं ले रहा है। तृणमूल कांग्रेस जहां बीजेपी पर केंद्रीय एजेंसियों (ED, CBI) और शारीरिक हमलों के जरिए डराने का आरोप लगाती है, वहीं बीजेपी का कहना है कि बंगाल में कानून व्यवस्था का पूरी तरह जनाजा उठ चुका है।

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