बस्तर में खाद की कालाबाजारी पर बड़ा प्रहार, अब आधार कार्ड दिखाने पर ही मिलेगा उर्वरक
बस्तर: जिले में रासायनिक खाद की कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने बड़ी सख्ती शुरू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब सहकारी समितियों के साथ-साथ सभी निजी खाद विक्रेताओं को पॉश मशीन के जरिए ही उर्वरक की बिक्री करनी होगी। इसके साथ ही किसानों को खाद लेने के लिए आधार कार्ड दिखाना अनिवार्य कर दिया गया है।
पूरी बिक्री होगी डिजिटल, सीधे पोर्टल पर दर्ज होगा रिकॉर्ड
नई व्यवस्था के अनुसार खाद की हर खरीद-बिक्री का विवरण सीधे सरकारी पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। इससे वितरण प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी और अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सकेगी। विभाग ने फसलों और भूमि की जरूरत के आधार पर खाद की सीमा भी तय कर दी है, ताकि आवश्यकता से अधिक या अवैध भंडारण को रोका जा सके।
निजी विक्रेताओं पर कड़ी निगरानी, मशीन अनिवार्य
जिले में कुल 184 निजी खाद विक्रेता पंजीकृत हैं, जिनमें से अभी भी 20 दुकानदारों के पास पॉश मशीन उपलब्ध नहीं है। कृषि विभाग को आशंका है कि ऐसे विक्रेता नियमों का उल्लंघन कर सकते हैं। इसी कारण इन सभी दुकानदारों की यूनिक आईडी तैयार कर उनकी सख्त निगरानी शुरू कर दी गई है।
पिछले वर्षों में बढ़ी खाद की खपत
आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच वर्षों में जिले में रासायनिक खाद की खपत 27 हजार टन से बढ़कर 40 हजार टन से अधिक पहुंच गई है। बढ़ती मांग के बीच विभाग अब पूरी व्यवस्था को नियंत्रित और पारदर्शी बनाने पर जोर दे रहा है, ताकि किसानों को समय पर और सही मात्रा में खाद उपलब्ध हो सके।
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि इस कदम से न सिर्फ कालाबाजारी पर रोक लगेगी, बल्कि खाद वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।
