दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सोनम वांगचुक मेदांता अस्पताल शिफ्ट, गुरुग्राम में कड़ी सुरक्षा; पुलिस ने संभाला मोर्चा
गुरुग्राम: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को मंगलवार शाम दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर बेहतर उपचार के लिए दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। स्वास्थ्य कारणों को देखते हुए अदालत ने उन्हें उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। शाम करीब साढ़े सात बजे विशेष एंबुलेंस के जरिए उन्हें मेदांता मेडिसिटी में भर्ती कराया गया।
हाईकोर्ट के निर्देश पर हुआ अस्पताल स्थानांतरण
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच गुरुग्राम लाया गया। पूरे रास्ते पुलिस का काफिला एंबुलेंस के साथ मौजूद रहा ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौती से निपटा जा सके।
मेदांता अस्पताल के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा
सोनम वांगचुक के मेदांता अस्पताल पहुंचने की सूचना मिलते ही अस्पताल परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई। अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रवेश द्वार पर आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति की जांच की जा रही है और बिना पहचान पत्र तथा सत्यापन के किसी को भी अस्पताल के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए अस्पताल परिसर में वज्र वाहन भी तैनात किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटा जा सके।
मरीज की गोपनीयता और इलाज पर विशेष ध्यान
मेदांता अस्पताल प्रशासन के अनुसार मरीज की सुरक्षा और गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक चिकित्सकीय प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक चिकित्सकीय निगरानी जारी है।
मेडिकल रिकॉर्ड भी साथ भेजे गए
उपचार की निरंतरता बनाए रखने के लिए सोनम वांगचुक के सभी मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और उपचार से जुड़े दस्तावेज सफदरजंग अस्पताल से मेदांता की चिकित्सकीय टीम को सौंप दिए गए हैं। अब विशेषज्ञ डॉक्टर उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन कर आगे की जांच और उपचार की प्रक्रिया तय करेंगे।
अस्पताल परिसर में आवाजाही पर भी नियंत्रण
सुरक्षा कारणों से अस्पताल की पार्किंग का एक हिस्सा खाली कराया गया है, ताकि एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध रहे। इसके साथ ही अस्पताल के भीतर मरीजों और तीमारदारों की आवाजाही भी नियंत्रित की गई है।
