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2017 से अब तक यूपी के कितने 13 IAS अफसरों ने छोड़ी नौकरी, दिव्या मित्तल के इस्तीफे ने फिर उठाया सवाल,क्या नौकरशाही में बढ़ रहा है ‘मोहभंग’?

लखनऊ। IAS की नौकरी को देश की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी सेवाओं में गिना जाता है। लाखों युवा जिस सेवा में आने का सपना देखते हैं, वहां पहुंचने के बाद कोई अधिकारी अगर समय से पहले नौकरी छोड़ने का फैसला करे तो सवाल उठना स्वाभाविक है। अब 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल के इस्तीफे ने इस पूरे ट्रेंड को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

प्रशासनिक रिकॉर्ड को देखें तो 2017 से अब तक कम-से-कम 12 ऐसे नाम सामने आते हैं, जिन्होंने इस्तीफा या VRS के जरिए सामान्य सेवानिवृत्ति से पहले सेवा छोड़ी या छोड़ने की प्रक्रिया पूरी की। इसमें दिव्या मित्तल को शामिल करने पर संख्या 13 तक पहुंचती है, हालांकि उनके इस्तीफे की औपचारिक स्वीकृति की प्रक्रिया अलग प्रशासनिक चरण हो सकती है।

2022 में अचानक क्यों मची थी VRS की हलचल?

उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में इस प्रवृत्ति ने सबसे ज्यादा सुर्खियां 2022 में बटोरी थीं। जुलाई-अगस्त 2022 में एक सप्ताह के भीतर तीन वरिष्ठ IAS अधिकारी रेणुका कुमार, जूथिका पाटणकर और विकास गोठलवाल ने VRS के लिए आवेदन किया था। रेणुका कुमार उस समय केंद्र में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय में सचिव थीं और उन्हें केंद्र से उत्तर प्रदेश वापस भेजा गया था। उनके VRS आवेदन को बाद में मंजूरी भी मिल गई।
जूथिका पाटणकर और विकास गोठलवाल के आवेदन में पारिवारिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण बताए गए थे। विकास गोठलवाल बाद में सामाजिक क्षेत्र और पब्लिक पॉलिसी से जुड़े काम में सक्रिय हुए। इसके बाद विद्या भूषण ने भी VRS का रास्ता चुना। 2008 बैच के अधिकारी के VRS को 2023 में मंजूरी मिली। उन्होंने स्वास्थ्य/व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया था। यानी 2022-23 का दौर उत्तर प्रदेश कैडर में समय से पहले सेवा छोड़ने के मामलों के लिहाज से खास तौर पर महत्वपूर्ण रहा।

2019 में राजीव अग्रवाल ने छोड़ी IAS

इस कहानी की शुरुआत 2017 के बाद के दौर में सबसे प्रमुख रूप से 1993 बैच के IAS अधिकारी राजीव अग्रवाल के मामले से दिखाई देती है।राजीव अग्रवाल ने 2019 में VRS लिया था। उस समय कारण निजी बताया गया था। बाद में उन्होंने निजी क्षेत्र में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और Uber तथा Facebook जैसी कंपनियों से जुड़े।

पांच साल में एक साथ कई नाम

2022 के बाद यह सिलसिला पूरी तरह रुका नहीं। रिग्जिन सैंफेल ने 2023 में VRS के लिए आवेदन किया। वह 2003 बैच के अधिकारी थे और उस समय उत्तर प्रदेश के रेजिडेंट कमिश्नर के रूप में दिल्ली में तैनात थे। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी कारण बताए और अपने गृह क्षेत्र लद्दाख लौटने की इच्छा भी जताई। इसी दौर में रवींद्र पाल सिंह का नाम भी सामने आया। उन्होंने फरवरी 2023 में VRS मांगा था और बाद में दिसंबर 2024 में उत्तर प्रदेश सरकार ने उनका VRS मंजूर कर दिया। उन्होंने व्यक्तिगत कारण बताए थे।

अभिषेक सिंह का इस्तीफा सबसे अलग क्यों?

2011 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक सिंह का मामला बाकी अधिकारियों से अलग रहा। उन्होंने अक्टूबर 2023 में इस्तीफा दिया, जिसे केंद्र सरकार ने फरवरी 2024 में स्वीकार किया। इससे पहले वह गुजरात विधानसभा चुनाव में पर्यवेक्षक की ड्यूटी से जुड़ी सोशल मीडिया तस्वीरों के विवाद के बाद निलंबित हुए थे। इस्तीफे के बाद उनके लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं भी तेज हुई थीं।

मोहम्मद मुस्तफा ने सेवा समाप्त से चार साल पहले लिया VRS

2024 में 1995 बैच के IAS अधिकारी मोहम्मद मुस्तफा ने भी VRS ले लिया। उस समय उनके पास सेवा के लगभग चार साल बाकी थे।
मुस्तफा उत्तर प्रदेश में प्रमुख सचिव सार्वजनिक उद्यम जैसे महत्वपूर्ण पद पर रह चुके थे और प्रतापगढ़, रामपुर, फतेहपुर तथा बलरामपुर के जिलाधिकारी भी रहे थे। VRS के पीछे उन्होंने व्यक्तिगत कारण बताए। बाद में उनके निजी क्षेत्र में जाने की चर्चा सामने आई। उत्तर प्रदेश सरकार ने जून 2024 में उनके VRS को मंजूरी दे दी।

2025 में आमोद कुमार का फैसला

नवंबर 2025 में 1995 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी आमोद कुमार ने VRS ले लिया। वह अखिलेश यादव सरकार के समय मुख्यमंत्री के सचिव भी रह चुके थे। उनके VRS को मंजूरी मिली और यह 25 नवंबर 2025 से प्रभावी हुआ। रिपोर्टों में उनके फैसले के पीछे व्यक्तिगत कारण बताए गए। उनके पास लगभग छह साल की सेवा बाकी थी। इस लोकवाणी के जनक के रूप में चर्चे में आए।

अनामिका सिंह ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की चर्चा के बीच ली VRS

दिसंबर 2025 में 2004 बैच की IAS अधिकारी अनामिका सिंह ने VRS मांगा। उस समय वह खाद्य एवं रसद आयुक्त थीं।आधिकारिक तौर पर उन्होंने व्यक्तिगत कारण बताए। लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा रही कि वह केंद्र में प्रतिनियुक्ति चाहती थीं और NOC नहीं मिलने से निराश थीं। जनवरी 2026 में उनका VRS मंजूर हुआ और 30 जनवरी से प्रभावी हुआ।

और फिर आई दिव्या मित्तल की बारी
अब 30 अगस्त 2026 को 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 साल की सेवा के बाद इस्तीफा दे दिया।लेकिन दिव्या मित्तल का मामला बाकी मामलों से थोड़ा अलग है। उन्होंने अपने इस्तीफे में किसी विवाद, राजनीतिक दबाव या प्रशासनिक असंतोष को वजह नहीं बताया।इसके बजाय उनका संदेश बेहद भावुक था।उन्होंने IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु की पढ़ाई के बाद लंदन में नौकरी करने, फिर देश लौटकर IAS बनने और उत्तर प्रदेश में काम करने की यात्रा को याद किया।

उन्होंने देवरिया और मिर्जापुर को अपनी प्रशासनिक सीख का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। मिर्जापुर के लहुरिया दह की पहाड़ी पर पानी पहुंचाने की घटना को उन्होंने अपनी जिंदगी की सबसे भावुक यादों में शामिल किया। बाद में एक बातचीत में दिव्या मित्तल ने साफ किया कि उनका फैसला किसी अचानक हुए ‘ट्रिगर’ का परिणाम नहीं था, बल्कि सोच-समझकर लिया गया फैसला था।

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