छत्तीसगढ़ में खेतों का डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा गेमचेंजर! अब फसल की तस्वीर से तय होगा रकबा, किसानों को मिलेंगे कई फायदे
जगदलपुर: बस्तर संभाग में खेती से जुड़े आंकड़ों को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे की शुरुआत की गई है। इस व्यवस्था के तहत खेत की जियो-लोकेशन, बोई गई फसल और उसके रकबे की जानकारी डिजिटल माध्यम से दर्ज की जा रही है। इससे कागजी रिकॉर्ड और खेत की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को पहचानने में मदद मिलेगी।
संभाग के सात जिलों में अब तक धान का कुल रकबा 1,54,488.179 हेक्टेयर दर्ज किया गया है। इसमें कांकेर 66,571.341 हेक्टेयर के साथ सबसे आगे है। कोंडागांव में 34,489.070 हेक्टेयर और बस्तर में 30,522.286 हेक्टेयर धान का रकबा दर्ज हुआ है। बीजापुर में 9,886.216 हेक्टेयर और सुकमा में 5,846.649 हेक्टेयर धान का रकबा दर्ज किया गया है। वहीं नारायणपुर में 5,062.022 हेक्टेयर और दंतेवाड़ा में 2,110.595 हेक्टेयर रकबा दर्ज हुआ है।
फसल की वास्तविक स्थिति का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
डिजिटल क्रॉप सर्वे के दौरान खेतों में जाकर बोई गई फसल की जानकारी जुटाई जा रही है। खेत की जियो-लोकेशन के साथ फसल और रकबे का विवरण दर्ज किया जा रहा है। इससे कृषि भूमि से संबंधित आंकड़ों को अधिक व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित किया जा सकेगा और वास्तविक स्थिति के आधार पर कृषि संबंधी योजनाएं तैयार करने में मदद मिलेगी।
फसल नुकसान और बीमा दावे में मिलेगी मदद
डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से फसल खराब होने की स्थिति में नुकसान का आकलन अधिक सटीक तरीके से किया जा सकेगा। इसका फायदा फसल बीमा के दावों के निपटारे में भी मिल सकता है। इसके अलावा सरकार को खाद, बीज, राहत और विभिन्न कृषि योजनाओं की जरूरत के अनुसार योजना बनाने के लिए वास्तविक आंकड़े उपलब्ध होंगे।
एग्री स्टैक के तहत शुरू हुआ अभियान
छत्तीसगढ़ में कृषि भूमि और फसलों से संबंधित रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने की दिशा में यह अभियान केंद्र सरकार के एग्री स्टैक कार्यक्रम के तहत चलाया जा रहा है। डिजिटल क्रॉप सर्वे के दौरान मोबाइल ऐप और सैटेलाइट इमेजरी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सर्वेयर खेतों तक पहुंचकर फसल की तस्वीर मोबाइल ऐप पर अपलोड कर रहे हैं, जिसके आधार पर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
नारायणपुर में 55 हजार से ज्यादा खसरों का सर्वे
नारायणपुर जिले में भी डिजिटल क्रॉप सर्वे शुरू किया गया है। यहां पारंपरिक मैन्युअल गिरदावरी व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ा गया है। 17 अगस्त 2026 से शुरू हुए अभियान के तहत 176 ग्रामों के कुल 55 हजार 638 खसरों और प्लॉटों का डिजिटल सर्वे किया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य निर्धारित समय-सीमा में सर्वे पूरा कर कृषि और राजस्व रिकॉर्ड को अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाना है।
किसानों तक योजनाओं की पहुंच होगी बेहतर
डिजिटल सर्वे से उपलब्ध होने वाले वास्तविक आंकड़े कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। फसल और खेत से संबंधित जानकारी व्यवस्थित रूप से उपलब्ध होने पर किसानों के लिए संचालित योजनाओं की जरूरत तय करने और उनका लाभ सही तरीके से पहुंचाने में भी सहायता मिल सकती है।
