Gen-Z पर नजर, SP से जल्द सीट डील और संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी, राहुल गांधी का ‘मिशन UP 2027’ प्लान
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन कांग्रेस ने राज्य में अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। पार्टी के भीतर राहुल गांधी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के लिए तीन स्तरों पर रणनीति तैयार किए जाने की चर्चा है। इसमें युवाओं, खासकर Gen-Z के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करना, संगठन को नए सिरे से खड़ा करना और सीट बंटवारे को लेकर विवाद से पहले समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की रूपरेखा तय करना शामिल है।
कांग्रेस का आकलन है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में उसके लिए राजनीतिक जमीन मजबूत हुई है। पार्टी अब इसी आधार को 2027 के विधानसभा चुनाव में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
छात्रों के मुद्दों के जरिए Gen-Z तक पहुंचने की कोशिश
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के तीसरे चरण में प्रयागराज जा रहे हैं। कांग्रेस के लिए प्रयागराज का राजनीतिक और ऐतिहासिक महत्व भी काफी अहम है। गांधी परिवार का इस शहर से पुराना जुड़ाव रहा है।
प्रयागराज स्थित आनंद भवन कभी पंडित जवाहरलाल नेहरू का आवास रहा था और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी रहा। बाद में इंदिरा गांधी ने 1970 में इसे भारत सरकार को दान कर दिया था।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि संसद से लेकर सड़क तक छात्र और युवा मुद्दों पर राहुल गांधी की सक्रियता का असर Gen-Z के बीच दिखाई दे रहा है। पार्टी को मिले फीडबैक के मुताबिक, जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन में उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में युवा पहुंचे थे।
कांग्रेस अब इसी युवा वर्ग को 2027 के चुनाव से पहले अपने राजनीतिक आधार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना चाहती है।
अखिलेश की SP से जल्द सीट समझौते पर जोर
उत्तर प्रदेश की रणनीति का दूसरा बड़ा हिस्सा समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार को 10 जनपथ में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश के कांग्रेस सांसदों की बैठक हुई।
इस बैठक में कांग्रेस के सभी छह लोकसभा सांसदों के अलावा राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, प्रमोद तिवारी और राजीव शुक्ला भी मौजूद रहे।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में समाजवादी पार्टी के साथ सीट बंटवारे को जल्द अंतिम रूप देने पर जोर दिया गया। कांग्रेस के भीतर यह राय है कि संसद का सत्र 13 अगस्त को खत्म होने के बाद दोनों दलों के बीच समन्वय की औपचारिक घोषणा 20 अगस्त तक हो जानी चाहिए।
पार्टी नेताओं को आशंका है कि सीट बंटवारे में ज्यादा देरी होने पर गठबंधन के भीतर भ्रम और आपसी बयानबाजी बढ़ सकती है।
राहुल-अखिलेश की केमिस्ट्री मजबूत, दूसरी पंक्ति में बयानबाजी चुनौती
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच संबंधों को लेकर पार्टी के भीतर सकारात्मक आकलन है। राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच बेहतर तालमेल होने की बात कही जा रही है।
हालांकि, दोनों दलों के दूसरे स्तर के नेता सीटों और गठबंधन की रणनीति को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक बयान देते रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि सीट बंटवारे की प्रक्रिया अगर जल्द शुरू होकर समय पर पूरी हो जाती है तो चुनाव से पहले संभावित टकराव को काफी हद तक टाला जा सकता है।
गठबंधन के साथ संगठन मजबूत करने पर भी जोर
राहुल गांधी की रणनीति का तीसरा अहम हिस्सा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के संगठन को मजबूत करना है। पार्टी के भीतर साफ संदेश दिया गया है कि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन अपनी जगह है, लेकिन कांग्रेस को अपने संगठन को भी जमीनी स्तर पर मजबूत करना होगा।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश में मजबूत राजनीतिक आधार के बिना दिल्ली की सत्ता में निर्णायक भूमिका हासिल करना मुश्किल होगा।
इसी रणनीति के तहत पार्टी ने पूर्व आप मंत्री और अंबेडकरवादी नेता राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उन्हें दलित मतदाताओं के बीच कांग्रेस की पहुंच बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।
कांग्रेस का आकलन है कि बसपा प्रमुख मायावती का राजनीतिक प्रभाव कमजोर हुआ है। ऐसे में पार्टी दलित मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक जगह बनाने का अवसर देख रही है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव
उत्तर प्रदेश कांग्रेस संगठन में भी बदलाव किए गए हैं। प्रियंका गांधी के करीबी माने जाने वाले पुराने एआईसीसी सचिवों प्रदीप नरवाल, धीरज गुर्जर और तौकीर आलम की जगह अभिषेक दत्त, कुणाल चौधरी, जगदीश चंद्र जांगिड़, संजीव आर्य, वरुण चौधरी और अब्दुल हन्नान को जिम्मेदारियां दी गई हैं।
पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि संगठन में ये बदलाव लंबे समय से जरूरी थे। नए चेहरों को जिम्मेदारी मिलने से राज्य इकाई में नई ऊर्जा आने की उम्मीद जताई जा रही है।
2027 को 2029 की बड़ी तैयारी के तौर पर देख रही कांग्रेस
कांग्रेस के भीतर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को केवल राज्य की सत्ता की लड़ाई के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। पार्टी का मानना है कि अगर उत्तर प्रदेश में उसकी राजनीतिक स्थिति मजबूत होती है तो इसका फायदा 2029 के लोकसभा चुनाव में उत्तर भारत की राजनीति में मिल सकता है।
यानी राहुल गांधी की उत्तर प्रदेश रणनीति में युवा वोटरों तक पहुंच, संगठन का विस्तार और समाजवादी पार्टी के साथ समय रहते सीट समझौता—तीनों मोर्चों पर एक साथ काम करने की कोशिश है। अब इस रणनीति की असली परीक्षा जमीनी स्तर पर संगठन की सक्रियता और 2027 के चुनावी समीकरणों में होगी।
