द्रंग में कांग्रेस का सियासी किला ध्वस्त, कौल सिंह ठाकुर के गढ़ में जिला परिषद चुनाव में करारी हार
मंडी: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के द्रंग क्षेत्र में हुए जिला परिषद चुनावों ने कांग्रेस के लिए बड़ा सियासी झटका साबित किया है। पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है, जहां छह में से किसी भी सीट पर कांग्रेस अपना खाता नहीं खोल सकी।
गढ़ में कांग्रेस का सूपड़ा साफ
द्रंग क्षेत्र में आए नतीजों ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ माने जाने वाले इस इलाके में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और जिला परिषद की सभी सीटों पर उसे हार का सामना करना पड़ा। इस हार को कांग्रेस के लिए बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
परिवारिक राजनीति पर भी पड़ा असर
इस चुनावी मुकाबले में कौल सिंह ठाकुर के लिए सबसे बड़ी चुनौती उनके भतीजे प्रवीण ठाकुर की राजनीतिक स्थिति को मजबूत करना था। पार्टी नेतृत्व और पूर्व मंत्री ने पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन इसके बावजूद जनता का समर्थन नहीं मिला और उनका चुनावी दांव सफल नहीं हो सका।
‘चेलों’ ने बिगाड़ा खेल, गुरु की पकड़ कमजोर
राजनीतिक समीकरणों में पूर्व मंत्री के कुछ पुराने सहयोगियों का भी प्रभाव देखा गया, जिन्होंने इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाई। माना जा रहा है कि इन्हीं समीकरणों ने कांग्रेस के प्रदर्शन को कमजोर किया और पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ।
छह में से कई सीटों पर अलग-अलग परिणाम
द्रंग और जोगेंद्रनगर क्षेत्र की छह सीटों में से कुछ पर भाजपा ने बढ़त बनाई, जबकि एक सीट पर बागी उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। वहीं एक सीट पर वाम दल की प्रत्याशी ने भी जीत हासिल कर राजनीतिक मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया।
सेमीफाइनल मानी जा रही थी यह चुनावी लड़ाई
इस चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था, जिसमें कांग्रेस को मिली हार ने पार्टी के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इस परिणाम के बाद क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं और सभी दल अब अगले बड़े मुकाबले की रणनीति पर नजरें टिकाए हुए हैं।
