शिक्षा से वंचित बच्चा पूरे समाज पर बन सकता है बोझ: CM योगी, ईरान-अमेरिका तनाव का जिक्र कर दिया बड़ा संदेश
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा को लेकर बड़ा और सख्त संदेश देते हुए कहा है कि यदि समाज का एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित रह जाता है, तो उसके दुष्परिणाम पूरे देश और समाज को लंबे समय तक भुगतने पड़ते हैं। उन्होंने ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी एक विवाद का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है, ठीक उसी तरह शिक्षा से दूर रह गया व्यक्ति भी समाज के लिए चुनौती बन सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह और चेक वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर दुनिया के लगभग 200 देशों और 800 करोड़ लोगों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि समाज में भी यही स्थिति लागू होती है। यदि एक भी व्यक्ति शिक्षित नहीं होता, तो उसका असर व्यापक स्तर पर दिखाई देता है।
हर बच्चे को स्कूल भेजना सरकार और समाज की जिम्मेदारी
सीएम योगी ने कहा कि प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अंशकालिक अनुदेशकों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर हमेशा अनुशासन और संयम बनाए रखा और कभी भी दबाव या हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों में भारी कमी आई है। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में ड्रॉपआउट दर 17 से 18 प्रतिशत तक थी, यानी हर 100 बच्चों में से 17 या 18 बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ देते थे। अब यह आंकड़ा घटकर लगभग 3 प्रतिशत रह गया है और सरकार का लक्ष्य इसे पूरी तरह शून्य तक पहुंचाना है।
2017 से पहले बदहाल थी प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था
योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था बेहद खराब स्थिति में थी। कई स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि जब नेतृत्व भ्रष्ट और दिशाहीन होता है, तब असफलताओं का ठीकरा शिक्षकों और कर्मचारियों पर फोड़ा जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में ऐसे स्कूलों से अनुदेशकों की सेवाएं समाप्त करने का प्रस्ताव था, जहां छात्र संख्या 100 से कम थी, लेकिन उनकी सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि पहले न तो स्पष्ट नीति थी और न ही ईमानदार नीयत, इसलिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव नहीं हो पा रहा था।
अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17 हजार रुपये किया गया
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अंशकालिक अनुदेशकों के लिए कई अहम घोषणाएं भी कीं। उन्होंने बताया कि सरकार ने अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17 हजार रुपये प्रतिमाह करने का फैसला लिया है। इसके अलावा उन्हें और उनके परिवार को 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर भी दिया जाएगा।
सीएम योगी ने कहा कि शिक्षकों और उनके परिवारों को कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके लिए पोर्टल तैयार किया जा चुका है और अगले सप्ताह से स्वास्थ्य कार्ड वितरण का काम शुरू किया जाएगा।
‘शिक्षक और अनुदेशक शिक्षा व्यवस्था की मजबूत नींव’
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षक और अनुदेशक शिक्षा व्यवस्था की नींव होते हैं। नींव दिखाई नहीं देती, लेकिन वही किसी भी मजबूत इमारत का आधार होती है। उन्होंने कहा कि सरकार का मानना है कि अनुदेशकों और शिक्षा मित्रों का मानदेय सम्मानजनक होना चाहिए और उनके कार्य में भी गरिमा दिखाई देनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2011-12 में प्रदेश के 13,769 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 41,307 अनुदेशकों की नियुक्ति 7 हजार रुपये मासिक मानदेय पर की गई थी। वर्तमान में इनकी संख्या घटकर लगभग 24,296 रह गई है।
