Monday, March 2, 2026
उत्तराखंड

उत्तराखंड में उच्च शिक्षा का बड़ा बदलाव: अब यूनिवर्सिटी छात्रों के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण अनिवार्य, सरकार सख्त निगरानी मोड में

देहरादून से बड़ी शिक्षा नीति से जुड़ी खबर सामने आई है, जहां राज्य के राजकीय विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। नए निर्देशों के तहत सभी विश्वविद्यालयों को विभिन्न क्षेत्रों के उद्योगों के साथ एमओयू करना होगा, ताकि विद्यार्थियों को उनके विषय से जुड़ा व्यावहारिक अनुभव मिल सके। साथ ही प्रशिक्षण की मासिक प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजना भी अनिवार्य किया गया है।

कौशल आधारित शिक्षा पर सरकार का फोकस
उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार यह कदम कौशल आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। सरकार का मानना है कि केवल सैद्धांतिक पढ़ाई से आगे बढ़कर व्यावहारिक अनुभव मिलने पर छात्रों की रोजगार क्षमता मजबूत होगी और वे उद्योगों की कार्यप्रणाली को बेहतर समझ पाएंगे। इसी के साथ विश्वविद्यालयों को उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों में बदलाव करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मंत्री ने दी सख्त चेतावनी
राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने स्पष्ट कहा है कि सभी विश्वविद्यालयों को उद्योगों के साथ समन्वय स्थापित कर छात्रों को कौशल विकास से जोड़ना ही होगा। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण प्रक्रिया की शासन स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी और लापरवाही बरतने वाले संस्थानों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

12 विश्वविद्यालयों से जुड़े 119 कॉलेज, 80 हजार छात्र प्रभावित
राज्य के 12 राजकीय विश्वविद्यालयों से कुल 119 महाविद्यालय संबद्ध हैं। इनमें सर्वाधिक 59 कॉलेज श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय और 54 कॉलेज कुमाऊं विश्वविद्यालय हल्द्वानी से जुड़े हैं। इन संस्थानों में 80 हजार से ज्यादा छात्र अध्ययनरत हैं, जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों से आती है। ऐसे में कौशल आधारित प्रशिक्षण को उनके भविष्य के लिए अहम कदम माना जा रहा है।

मैदानी जिलों में उद्योग, पहाड़ी क्षेत्रों के लिए चुनौती
प्रदेश के करीब 70 प्रतिशत उद्योग हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल और देहरादून जैसे मैदानी जिलों में केंद्रित हैं, जिससे वहां के संस्थानों के लिए उद्योगों से करार करना आसान रहेगा। हालांकि चमोली और उत्तरकाशी जैसे दूरस्थ पर्वतीय जिलों के कॉलेजों के लिए यह प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, जिसके समाधान पर सरकार वैकल्पिक मॉडल तैयार करने पर विचार कर रही है।

डिजिटल पोर्टल से होगी पूरी प्रक्रिया की निगरानी
सरकार औद्योगिक प्रशिक्षण को पारदर्शी बनाने के लिए एक डिजिटल पोर्टल विकसित कर रही है, जहां विश्वविद्यालयों को एमओयू, प्रशिक्षण, उपस्थिति और प्रगति से जुड़ी सभी जानकारी अपलोड करनी होगी। इससे शासन स्तर पर निगरानी आसान होगी और समय-समय पर मूल्यांकन भी किया जा सकेगा।