उत्तर प्रदेशलखनऊ

यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला! महिला कल्याण विभाग में भर्ती का रास्ता साफ, नियमावली संशोधन को मिली मंजूरी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला कल्याण विभाग में अलिपिकीय (नॉन-क्लैरिकल) कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश महिला कल्याण विभाग अलिपिकीय कर्मचारी सेवा नियमावली, 1998 में प्रथम संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इस संशोधन के बाद लंबे समय से अटकी भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।

शैक्षिक योग्यता की समकक्ष अर्हता अब होगी स्पष्ट

महिला कल्याण विभाग के अनुसार वर्ष 1998 की मूल सेवा नियमावली में सीधी भर्ती के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यता की समकक्ष अर्हता का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। इसी वजह से अभ्यर्थियों की पात्रता तय करने में कठिनाई आती थी और भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होती थी।

अब उत्तर प्रदेश महिला कल्याण विभाग अलिपिकीय कर्मचारी सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2026 में समकक्ष शैक्षिक अर्हता का स्पष्ट प्रावधान कर दिया गया है, जिससे चयन प्रक्रिया में आने वाली बाधाएं दूर होंगी।

नियमावली में जोड़े गए नए प्रावधान

संशोधित नियमावली में समय-समय पर शासनादेशों के जरिए सृजित पदों की अद्यतन संख्या को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही वर्तमान वेतनमान के अनुरूप पे-मैट्रिक्स स्तर का उल्लेख भी नियमावली में किया गया है, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया मौजूदा व्यवस्था के अनुरूप संचालित हो सके।

सीधी भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष

कैबिनेट से मंजूर संशोधन में कार्मिक विभाग की 6 जून 2012 की अधिसूचना के अनुरूप सीधी भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष निर्धारित करने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। इससे भर्ती नियम वर्तमान सरकारी मानकों के अनुरूप हो जाएंगे।

भर्ती प्रक्रिया में नहीं आएगी कोई बाधा

महिला कल्याण विभाग का कहना है कि संशोधित नियमावली लागू होने के बाद समकक्ष शैक्षिक योग्यता को लेकर उत्पन्न होने वाले विवाद समाप्त होंगे। इसके साथ ही भविष्य में विभाग के अलिपिकीय पदों पर भर्ती प्रक्रिया बिना किसी प्रशासनिक बाधा के पूरी की जा सकेगी।