Saturday, May 9, 2026
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उत्तर प्रदेश

विपक्ष पर सियासी घेरा कसने की तैयारी: योगी सरकार ने बुलाया विशेष सत्र, महिला आरक्षण और सशक्तीकरण पर होगी लंबी बहस

लखनऊ में प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमाने वाली है। महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे और परिसीमन पर बने हालात के बीच राज्य सरकार ने 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। इस सत्र में महिला सशक्तीकरण को केंद्र में रखते हुए दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा कराई जाएगी, जिसे राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।

महिला सदस्यों को मिलेगा ज्यादा वक्त

इस विशेष सत्र की खास बात यह होगी कि चर्चा में महिला विधायकों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। 18वीं विधानसभा में कुल 51 महिला सदस्य हैं, जिनमें सबसे अधिक संख्या भाजपा की है। इसके अलावा सपा, अपना दल, कांग्रेस और रालोद की महिला सदस्य भी सदन में मौजूद हैं। वहीं विधान परिषद में महिला सदस्यों की संख्या सीमित है, लेकिन उन्हें भी बोलने का अवसर दिया जाएगा।

कार्यसूची तय करने के लिए अहम बैठक

सत्र से पहले कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में दोनों सदनों का एजेंडा तय किया जाएगा। हालांकि संकेत साफ हैं कि सरकार इस मंच का उपयोग महिला सशक्तीकरण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने और विपक्ष को घेरने के लिए करेगी।

संसदीय कार्य मंत्री पेश करेंगे प्रस्ताव

सूत्रों के मुताबिक, सत्र की शुरुआत में संसदीय कार्य मंत्री महिला सशक्तीकरण पर चर्चा का प्रस्ताव सदन में रखेंगे। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष और विभिन्न दलों के प्रतिनिधि अपनी बात रखेंगे। सत्तापक्ष की रणनीति है कि अधिक से अधिक महिला सदस्य इस बहस में हिस्सा लें, जिससे मुद्दे को व्यापक रूप से प्रस्तुत किया जा सके।

मुख्यमंत्री करेंगे समापन संबोधन

चर्चा के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सदन को संबोधित करेंगे। इस दौरान सरकार द्वारा महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं और पहलों का जिक्र किया जाएगा। साथ ही महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष, खासकर कांग्रेस और सपा, को घेरने की भी तैयारी है।

छह अध्यादेशों की जानकारी भी देगी सरकार

विशेष सत्र के दौरान सरकार उन छह अध्यादेशों की भी जानकारी सदन में देगी, जिन्हें हाल के महीनों में लागू किया गया है। इनमें लोक सेवा अधिकरण, राजस्व संहिता में संशोधन, वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय और निजी विश्वविद्यालय से जुड़े अध्यादेश शामिल हैं।

कुल मिलाकर यह विशेष सत्र केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए प्रदेश की राजनीति में महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर बड़ा संदेश देने की तैयारी भी दिखाई दे रही है।