कोटा मर्डर केस: बकरे के विवाद में गई थी जान, 8 साल बाद एक ही परिवार के 12 दोषियों को उम्रकैद
नई दिल्ली: राजस्थान के कोटा से जुड़े बहुचर्चित हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब आठ साल पुराने इस केस में एक ही परिवार के 12 लोगों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। मामला एक मामूली बकरे के विवाद से शुरू हुआ था, जिसने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया और एक युवक की जान चली गई।
विवाद सुलझाने पहुंचे युवकों पर किया गया था हमला
घटना 31 अगस्त 2018 की है, जब बकरे को लेकर पड़ोसियों के बीच विवाद चल रहा था। इसी विवाद को सुलझाने के लिए इस्तियाक हुसैन और उसके साथी यशपाल मौके पर पहुंचे थे। बातचीत के दौरान स्थिति बिगड़ गई और आरोपियों ने चाकू, लकड़ी और अन्य धारदार हथियारों से हमला कर दिया। इस हमले में इस्तियाक गंभीर रूप से घायल हो गया था।
इलाज के दौरान हुई मौत, मामला बना हत्या में तब्दील
हमले के बाद घायल इस्तियाक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मामला हत्या में दर्ज किया गया और पुलिस ने जांच शुरू की।
कोर्ट ने सभी 12 आरोपियों को ठहराया दोषी
लंबी सुनवाई और सबूतों के आधार पर अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश श्वेता शर्मा की अदालत ने सभी 12 आरोपियों को दोषी करार दिया। इनमें 10 पुरुष और 2 महिलाएं शामिल हैं। मुख्य आरोपी रमजानी (57), उसकी पत्नी फरजाना (43) और उनके बेटे मुख्तार (31), मुश्ताक (29) समेत अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 13-13 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
अन्य आरोपियों को भी मिली सख्त सजा
अदालत ने मुख्य आरोपियों के अलावा मुबारिक अली, सद्दाम खान, शाहीन खानम, शाहरुख उर्फ लंगड़ा, जहीर खान, नईमुद्दीन उर्फ शोएब, शाहदत उर्फ भय्यू और शाहरुख को भी दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। सभी आरोपी एक ही परिवार से जुड़े हुए हैं।
रिटायर्ड एएसआई का इकलौता बेटा था मृतक
मामले की शिकायत मृतक के चचेरे भाई जाहिद हुसैन ने दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि विवाद को सुलझाने के दौरान ही हमला हुआ। मृतक इस्तियाक हुसैन एक रिटायर्ड एएसआई का इकलौता बेटा था। इस घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया था।
लंबी जांच और सुनवाई के बाद आया फैसला
पुलिस ने सभी आरोपियों को अलग-अलग समय पर गिरफ्तार कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। करीब आठ साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया, जिसे पीड़ित परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है।
