राजस्थान

राजस्थान में ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ पर लगी मुहर, पंचायत और निकाय चुनाव साथ कराने की तैयारी तेज; OBC आरक्षण को भी मंजूरी

जयपुर: राजस्थान में पंचायत राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनाव को लेकर भजनलाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल एवं मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य में ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ की अवधारणा लागू करने को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की दिशा में सरकार आगे बढ़ेगी। कैबिनेट ने राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग की रिपोर्ट को भी स्वीकार कर लिया है। इससे ओबीसी आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ हो गया है। अब एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों की लॉटरी की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसके बाद चुनाव कार्यक्रम तय होने की संभावना है।

ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को मिली मंजूरी

राज्य सरकार को ओबीसी आयोग की रिपोर्ट 5 अगस्त को प्राप्त हुई थी। शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही पंचायत राज एवं नगरीय निकाय अधिनियम में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के तहत ओबीसी आरक्षण का प्रावधान लागू करने का निर्णय लिया गया है। अब आरक्षित वार्डों और सीटों का निर्धारण लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। इसे पंचायत और निकाय चुनाव की तैयारियों में महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

अलग-अलग चुनाव से प्रशासन और विकास कार्यों पर पड़ता है दबाव

कैबिनेट बैठक में सरकार की ओर से कहा गया कि पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव अलग-अलग समय पर होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसका असर विकास कार्यों की गति पर भी पड़ता है। अलग-अलग चुनाव कराने में धन, समय और मानव संसाधनों की अधिक खपत होती है। इन्हीं कारणों को देखते हुए सरकार ने ‘वन स्टेट-वन इलेक्शन’ मॉडल अपनाने का निर्णय लिया है, ताकि स्थानीय निकायों और पंचायतों के चुनाव एक साथ कराए जा सकें।

सरकार का मानना है कि एक साथ चुनाव होने से चुनावी खर्च कम होगा और प्रशासनिक मशीनरी का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके अलावा बार-बार चुनाव आचार संहिता लागू होने से विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाएं भी कम होंगी। सरकार के इस फैसले को राज्य की चुनावी व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

ओबीसी आरक्षण से चुनावी तैयारियों को मिलेगी रफ्तार

कैबिनेट की मंजूरी के बाद पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है। ओबीसी आरक्षण के मुद्दे के चलते चुनावी प्रक्रिया लंबे समय से प्रभावित थी। अब आयोग की सिफारिशों को मंजूरी मिलने के बाद आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों की लॉटरी पूरी होने के बाद वार्डों का अंतिम आरक्षण तय किया जाएगा। इसके बाद चुनाव कार्यक्रम घोषित करने का रास्ता साफ होने की संभावना है।

कृषि और खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026 को भी मंजूरी

कैबिनेट बैठक में स्थानीय चुनावों के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले भी लिए गए। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026 को मंजूरी दी गई। इसके तहत कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, डेयरी, कोल्ड स्टोरेज, पशु आहार, शहद, मसाले और श्रीअन्न आधारित उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा।

सरकार चरणबद्ध तरीके से प्रत्येक जिले में क्लस्टर आधारित फूड पार्क विकसित करेगी। इससे कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।

श्रम क्षेत्र में 48 घंटे साप्ताहिक काम का प्रावधान

श्रम क्षेत्र को लेकर भी कैबिनेट ने महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। मजदूरी संहिता (राजस्थान) नियम-2026 के तहत सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम का प्रावधान रहेगा। लगातार पांच घंटे काम कराने के बाद कर्मचारियों को आधे घंटे का विश्राम देना अनिवार्य होगा।

इसके अलावा महंगाई भत्ते में संशोधन उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर हर साल 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर को किया जाएगा। कर्मचारियों को वेतन पर्ची उपलब्ध कराना भी अनिवार्य होगा।

रोजगार, ऊर्जा और पर्यावरण को लेकर भी फैसले

कैबिनेट ने ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ के तहत ग्रामीण परिवारों को साल में 125 दिन रोजगार की वैधानिक गारंटी देने का फैसला किया है। इसके साथ ही ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट पॉलिसी को भी मंजूरी दी गई है।

स्वच्छ ऊर्जा नीति के तहत बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देने, अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं में 10 प्रतिशत भूमि पौधारोपण के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा जैसलमेर में सीमेंट परियोजनाओं और 922 मेगावाट क्षमता वाली तीन सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन को भी मंजूरी दी गई है।

9 से 17 अगस्त तक चलेगा ‘हर घर तिरंगा-2026’ अभियान

बैठक में 9 से 17 अगस्त तक ‘हर घर तिरंगा-2026’ अभियान चलाने का निर्णय भी लिया गया। इसके साथ ही सभी मंत्रियों को अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में मानसून की स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।

मंत्रियों को बिजली, पेयजल, सड़क, चिकित्सा और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा करने के साथ किसानों को उर्वरक और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।