दलित नेताओं की मायावती से मुलाकात की कोशिश पर यूपी की सियासत गरमाई, कांग्रेस ने खुद को किया अलग
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस समय बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया जब कांग्रेस के दो वरिष्ठ दलित नेताओं द्वारा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती से मिलने की कोशिश ने राजनीतिक माहौल को अचानक गर्म कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद न सिर्फ विपक्षी खेमे में चर्चाओं का दौर तेज हो गया, बल्कि कांग्रेस के भीतर भी इस पर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
मायावती के आवास पर बिना अपॉइंटमेंट पहुंचे नेता
कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम और बाराबंकी से सांसद व उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष तनुज पुनिया अचानक लखनऊ स्थित मॉल एवेन्यू में मायावती के आवास पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि ये नेता बिना पूर्व निर्धारित समय के मुलाकात के लिए पहुंचे थे।
हालांकि, पहले से कोई समय तय न होने का हवाला देते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने उनसे मुलाकात करने से इनकार कर दिया और दोनों नेताओं को वापस लौटना पड़ा।
राजनीतिक हलकों में तेज हुई अटकलें
इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे यूपी में विपक्षी दलों के बीच संभावित नए समीकरणों से जोड़कर देखा, तो कुछ ने इसे कांग्रेस के भीतर समन्वय की कमी के तौर पर भी बताया।
इस दौरान यह भी चर्चा रही कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के दौरे के बीच यह मुलाकात की कोशिश किसी राजनीतिक संदेश से जुड़ी हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
कांग्रेस ने खुद को दूरी पर किया
मामले के तूल पकड़ने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने तुरंत इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अपने नेताओं की इस पहल से दूरी बना ली। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने स्पष्ट कहा कि मायावती के आवास पर जाना नेताओं का व्यक्तिगत निर्णय था और पार्टी संगठन का इससे कोई संबंध नहीं है।
वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी इसे व्यक्तिगत पहल बताते हुए पार्टी की भूमिका से इनकार किया।
कांग्रेस के भीतर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस के अंदरूनी तालमेल और निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर प्रदेश नेतृत्व इस घटना से दूरी बनाता दिखा, वहीं दूसरी ओर पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग से जुड़े नेताओं की इस तरह की पहल ने संगठनात्मक असंतुलन की चर्चा को भी हवा दे दी है।
मायावती का सख्त संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती द्वारा बिना समय लिए मुलाकात से इनकार करना यह संकेत देता है कि वे अपने पारंपरिक दलित वोट बैंक पर किसी भी अन्य दल की राजनीतिक पैठ को लेकर सतर्क हैं।
राजेंद्र पाल गौतम का बयान
मुलाकात नहीं हो पाने के बाद राजेंद्र पाल गौतम ने मायावती की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके शासनकाल में प्रशासनिक क्षमता और निर्णायक नेतृत्व को व्यापक सराहना मिली है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल शिष्टाचार भेंट का था और भविष्य में समय मिलने पर मुलाकात की उम्मीद है।
