Jantar Mantar पर क्यों लगाए गए Mobile Jammer? जानिए कैसे बंद हो जाता है इंटरनेट और क्या है इसकी पूरी तकनीक
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को चल रहे CJP प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को मोबाइल नेटवर्क धीमा होने, कॉल कनेक्ट न होने और इंटरनेट सेवा प्रभावित होने जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से दिल्ली पुलिस ने कुछ स्थानों पर पोर्टेबल मोबाइल जैमर तैनात किए हैं। इन उपकरणों का इस्तेमाल सीमित क्षेत्र में कुछ समय के लिए मोबाइल नेटवर्क बाधित करने के लिए किया जाता है।
क्या होता है मोबाइल जैमर?
मोबाइल जैमर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है, जो मोबाइल नेटवर्क की फ्रीक्वेंसी पर रेडियो सिग्नल प्रसारित करता है। ये सिग्नल मोबाइल टावर से आने वाले नेटवर्क सिग्नलों में हस्तक्षेप पैदा करते हैं, जिससे मोबाइल फोन नेटवर्क से कनेक्ट नहीं हो पाता। इसका असर यह होता है कि कॉल, मोबाइल इंटरनेट और कई बार संदेश सेवा भी प्रभावित हो जाती है।
सीमित दायरे में ही होता है असर
मोबाइल जैमर का प्रभाव केवल एक निश्चित क्षेत्र तक सीमित रहता है। जैसे ही कोई व्यक्ति जैमर की रेंज से बाहर निकलता है या डिवाइस को बंद कर दिया जाता है, मोबाइल नेटवर्क सामान्य रूप से काम करने लगता है। इसलिए इसका प्रभाव पूरे शहर या बड़े इलाके पर नहीं पड़ता।
कैसे काम करता है मोबाइल जैमर?
जैमर चालू होते ही 3जी, 4जी और 5जी नेटवर्क की फ्रीक्वेंसी पर रेडियो तरंगें प्रसारित करता है। ये तरंगें मोबाइल टावर के सिग्नलों में बाधा उत्पन्न करती हैं, जिससे फोन टावर से संपर्क स्थापित नहीं कर पाता। इसकी रेंज में मौजूद लोगों को नेटवर्क गायब होने, कॉल न लगने, इंटरनेट बंद होने और संदेश सेवा प्रभावित होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
जंतर-मंतर पर क्यों लगाया गया मोबाइल जैमर?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जंतर-मंतर पर चल रहे CJP प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस ने पोर्टेबल मोबाइल जैमर का इस्तेमाल किया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे भीड़ के बीच रियल-टाइम संचार को सीमित करने और संवेदनशील पुलिस कार्रवाई के वीडियो या लाइव स्ट्रीम को तत्काल सोशल मीडिया पर साझा होने से रोकने में मदद मिल सकती है।
