Saturday, May 9, 2026
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उत्तर प्रदेश

यूपी में ग्राम प्रधानों के कार्यकाल खत्म होने से पहले बढ़ी हलचल, पंचायत चुनाव टलने की आशंका से सियासी सरगर्मी तेज

उत्तर प्रदेश में पंचायत स्तर पर सियासी हलचल तेज हो गई है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त होना तय है, लेकिन समय पर पंचायत चुनाव न होने की संभावना ने मौजूदा प्रधानों की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे बन गए हैं कि बचे हुए दिनों में प्रधान असमंजस और दबाव के बीच काम कर रहे हैं।

882 गांवों में प्रशासनिक व्यवस्था लागू होने की आशंका

जनपद के 12 ब्लॉकों और चार तहसीलों—महराजगंज, फरेंदा, निचलौल और नौतनवा—के अंतर्गत आने वाले 882 गांवों में यदि तय समय पर चुनाव नहीं होते हैं, तो प्रशासन गांवों की जिम्मेदारी प्रशासकों को सौंप सकता है। इससे पंचायत स्तर की वर्तमान व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

परतावल ब्लॉक में सबसे ज्यादा चर्चा और अनिश्चितता

परतावल ब्लॉक की 104 ग्राम पंचायतों में इस स्थिति को लेकर सबसे अधिक असमंजस बना हुआ है। अब तक विकास कार्यों और योजनाओं का संचालन ग्राम प्रधानों के माध्यम से होता रहा है, लेकिन प्रशासनिक हस्तक्षेप की संभावना से स्थानीय राजनीति का स्वरूप बदलता नजर आ रहा है।

नए चेहरों की चर्चा, मौजूदा प्रधानों की पकड़ कमजोर

गांवों में संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ गई है। खासतौर पर युवा चेहरे सामने आ रहे हैं, जिससे बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। इस माहौल में मौजूदा प्रधानों की पकड़ कमजोर पड़ती दिख रही है और चुनाव से पहले ही सियासी तापमान बढ़ गया है।

कार्यकाल बढ़ाने की मांग तेज, ज्ञापन सौंपे जा रहे

ग्राम प्रधान संगठन भी अब सक्रिय हो गया है। विभिन्न ब्लॉकों में प्रधानों द्वारा कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर ज्ञापन दिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव में देरी होने पर कार्यकाल बढ़ाया जाए, ताकि विकास कार्य प्रभावित न हों और योजनाएं बाधित न हों।

विकास कार्यों पर ब्रेक, मजदूरों में बढ़ी नाराजगी

पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है। मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान लंबित होने से श्रमिकों में असंतोष बढ़ रहा है। कई जगहों पर सामग्री आपूर्ति में कमी के चलते निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

आंदोलन की तैयारी में प्रधान संगठन

चुनाव में देरी और प्रशासक नियुक्ति को लेकर प्रधानों में नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। परतावल ब्लॉक सभागार में आयोजित बैठक में पदाधिकारियों की अगुआई में प्रधानों ने चेतावनी दी कि यदि समय पर चुनाव नहीं कराए गए या प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर स्पष्टता नहीं दी गई, तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। साथ ही मांगों की अनदेखी होने पर न्यायालय जाने की भी बात कही गई है।

आगे की कार्रवाई शासन के निर्देशों पर निर्भर

फिलहाल पंचायत व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आगे की कार्रवाई शासन से मिलने वाले निर्देशों के आधार पर तय की जाएगी, लेकिन मौजूदा हालात ने गांवों की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।