Friday, May 8, 2026
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उत्तर प्रदेश

यूपी के बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, मई में बिल 1.52 प्रतिशत कम; ईंधन अधिभार दरें हुईं ऋणात्मक

उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मई महीने में आने वाला बिजली बिल 1.52 प्रतिशत तक कम होगा। पावर कॉरपोरेशन ने बुधवार को ईंधन अधिभार शुल्क की नई दरें जारी कीं, जो गणना के बाद ऋणात्मक पाई गई हैं। इस फैसले से प्रदेश के उपभोक्ताओं को कुल मिलाकर करीब 118 करोड़ रुपये की राहत मिलने का अनुमान है। आमतौर पर बिजली उत्पादन लागत में उतार-चढ़ाव के आधार पर ईंधन अधिभार जोड़ा या घटाया जाता है, लेकिन इस बार दरें घटने से सीधे तौर पर बिल में कमी आएगी।

उपभोक्ता परिषद ने राहत का किया स्वागत, पुराने मुद्दों पर संघर्ष जारी
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे आम उपभोक्ताओं को निश्चित रूप से राहत मिलेगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फरवरी में हुई 10 प्रतिशत अधिक वसूली और पुराने औसत बिलिंग दर पर लंबे समय तक की गई वसूली के खिलाफ परिषद की लड़ाई जारी रहेगी। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं से जो अतिरिक्त वसूली की गई है, उसे वापस किया जाना चाहिए।

51 हजार करोड़ बकाया के बीच अधिभार वसूली पर सवाल
उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग से एक बार फिर मांग उठाई है कि जब बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का करीब 51 हजार करोड़ रुपये बकाया है, तब तक अधिभार की वसूली नहीं की जानी चाहिए। परिषद का कहना है कि अधिभार तभी प्रभावी माना जाए जब उसकी दरें ऋणात्मक हों, अन्यथा इसकी भरपाई बकाया राशि से की जानी चाहिए। साथ ही अधिभार गणना के मौजूदा फार्मूले की समीक्षा की भी मांग की गई है, जिसे परिषद उपभोक्ताओं के लिए नुकसानदायक बता रही है।

स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर विवाद गहराया, अवमानना याचिका दाखिल
स्मार्ट प्रीपेड मीटर के मुद्दे पर भी विवाद जारी है। उपभोक्ता परिषद ने इस मामले में नियामक आयोग में पावर कॉरपोरेशन के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता खत्म होने के बावजूद प्रदेश में नए बिजली कनेक्शन केवल प्रीपेड मीटर के साथ ही दिए जा रहे हैं, जो नियमों के खिलाफ है।

केंद्रीय प्रावधानों के उल्लंघन का आरोप
याचिका में कहा गया है कि यह व्यवस्था केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की अधिसूचना और विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का उल्लंघन है, जिसमें उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का विकल्प दिया गया है। इसके बावजूद सितंबर 2025 के बाद से पावर कॉरपोरेशन ने प्रीपेड मीटर के साथ ही नए कनेक्शन देना अनिवार्य कर दिया है।

नई अधिसूचना के बाद भी जारी है पुरानी व्यवस्था
परिषद का कहना है कि 1 अप्रैल 2026 को जारी नई अधिसूचना के बाद प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता स्वतः समाप्त हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद पुराने नियमों के तहत ही कनेक्शन दिए जा रहे हैं, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।