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अमरनाथ यात्रा में बड़ा घटनाक्रम! 5 दिन में लगभग विलीन हुए बाबा बर्फानी, फिर भी अटूट आस्था; 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं का इंतजार

श्रीनगर: अमरनाथ यात्रा 2026 के दौरान एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। यात्रा शुरू होने के महज पांच दिनों के भीतर पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग लगभग पूरी तरह विलीन हो गया है। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों के बीच बड़ी संख्या में भक्त बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए लगातार पहुंच रहे हैं।

3 जुलाई से शुरू हुई 57 दिन की अमरनाथ यात्रा के दौरान पहले छह दिनों में ही एक लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि बुधवार तक यह संख्या 1.30 लाख के पार पहुंच जाएगी। इस वर्ष करीब चार लाख श्रद्धालुओं ने यात्रा के लिए पंजीकरण कराया है, यानी अब भी तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं को दर्शन करने हैं।

कुछ ही दिनों में तेजी से पिघला प्राकृतिक शिवलिंग

जानकारी के अनुसार, 23 मई को ली गई तस्वीरों में प्राकृतिक हिम शिवलिंग की ऊंचाई करीब सात फीट थी। वहीं 29 जून को पहली पूजा के समय इसकी ऊंचाई पांच फीट से अधिक बताई गई। लेकिन 6 जुलाई तक सामने आई तस्वीरों में शिवलिंग का अधिकांश हिस्सा पिघल चुका था और वह लगभग पूरी तरह विलीन हो गया।

विशेषज्ञों ने बताए जल्द पिघलने के कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार शिवलिंग के जल्दी पिघलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें बढ़ता तापमान, कमजोर बर्फबारी, गर्मी का प्रभाव, गुफा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी से बढ़ने वाला तापमान और ग्लेशियरों पर धूल-मिट्टी जैसे प्रदूषण के कारण बर्फ का तेजी से पिघलना शामिल है। लगातार तीसरे वर्ष यात्रा के पहले सप्ताह में ही शिवलिंग लगभग विलीन होने की स्थिति सामने आई है।

आस्था पर नहीं पड़ा कोई असर

प्राकृतिक शिवलिंग के विलीन होने के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और विश्वास बरकरार है। दर्शन कर लौटे श्रद्धालुओं ने बताया कि गुफा में व्यवस्थाएं बेहतर हैं और उनका उद्देश्य बाबा के दरबार में पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त करना है। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि बाबा बर्फानी भले ही अब दिखाई नहीं दे रहे हों, लेकिन उनकी आस्था पहले की तरह अटूट है।

कुछ श्रद्धालुओं ने यह भी कहा कि भारी भीड़ श्रद्धा का प्रतीक है, जबकि कुछ ने सुझाव दिया कि यात्रा का समय पहले शुरू किया जाए ताकि अधिक श्रद्धालु प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन कर सकें। वहीं कुछ श्रद्धालुओं ने शिवलिंग के जल्द पिघलने के पीछे बढ़ती भीड़ और प्रदूषण को संभावित कारण बताया।

विज्ञान और आस्था का अनूठा संगम

वैज्ञानिकों के अनुसार, अमरनाथ गुफा में बनने वाला हिम शिवलिंग किसी मूर्ति के रूप में स्थापित नहीं होता, बल्कि गुफा की छत से टपकने वाली पानी की बूंदों के लगातार जमने से प्राकृतिक रूप से तैयार होता है। इसके निर्माण के लिए गुफा के भीतर लगातार शून्य से नीचे तापमान आवश्यक होता है। कम बर्फबारी, बढ़ते तापमान और जल प्रवाह में बदलाव के कारण इसके निर्माण और संरक्षण पर असर पड़ रहा है।

28 अगस्त तक चलेगी अमरनाथ यात्रा

अमरनाथ यात्रा 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से जारी है। यह यात्रा 28 अगस्त, रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से बिना पंजीकरण यात्रा पर न आने की अपील की है। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए केवल पंजीकृत श्रद्धालुओं को ही आगे जाने की अनुमति दी जा रही है।