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Delhi-NCR में बड़ा एक्शन! 2 लाख से ज्यादा पुराने ट्रक-बस होंगे बाहर, BS6 और इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने बड़ा फैसला लिया है। अब क्षेत्र में पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों एवं बसों पर सख्ती की जाएगी, जबकि बीएस-6 और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस दिशा में ‘परिवर्तन’ योजना को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

मंगलवार को विज्ञान भवन में आयोजित एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की 42वीं बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि एनसीआर के कुल प्रदूषण में लगभग 40 प्रतिशत योगदान ट्रकों और बसों से होने वाले उत्सर्जन का है। इसी वजह से दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान ने मिलकर भारी वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने पर सहमति जताई है।

क्या है ‘परिवर्तन’ योजना?

सरकार की ‘परिवर्तन’ योजना के तहत बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 मानकों वाले ट्रकों और बसों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाकर स्क्रैप किया जाएगा। इसके साथ ही बीएस-6 और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को तेजी से बढ़ावा दिया जाएगा।

योजना के अनुसार बीएस-4 श्रेणी के ट्रक और बसों को एनसीआर के बाहर के जिलों में बेचा जा सकेगा। वहीं बीएस-6 ट्रांजिशन स्कीम के तहत बीएस-4 वाहनों को बदलने पर 30 प्रतिशत तक की छूट देने का भी प्रावधान किया गया है।

दो लाख से ज्यादा वाहनों को बदलने की तैयारी

सरकार ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से 2 लाख से अधिक पुराने ट्रक और बसों को हटाने या अपग्रेड करने की योजना बनाई है। इसके तहत 1.91 लाख ट्रकों और 16,329 बसों की पहचान की गई है, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा।

इस अभियान को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने हाल ही में ‘स्वच्छ परिवहन योजना’ के तहत 9,585 करोड़ रुपये की विशेष योजना को मंजूरी भी दी है। इससे स्वच्छ और आधुनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी।

चार राज्यों की सहमति से आगे बढ़ेगी योजना

बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री ए.के. शर्मा, राजस्थान के शहरी विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा समेत विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और योजनाकार मौजूद रहे। सभी राज्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में योजना को अधिसूचित कर लागू करने पर सहमति जताई।

प्रदूषण पर कैसे पड़ेगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों पर इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों की संख्या बढ़ने से पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे खतरनाक प्रदूषक कणों में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान बनने वाली धुंध और स्मॉग की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा कार्बन उत्सर्जन घटने से पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। हालांकि भारी वाहनों को इलेक्ट्रिक तकनीक में बदलना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, सरकारी प्रोत्साहन और मजबूत नीतियों के जरिए इसे संभव बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।