Friday, April 17, 2026
उत्तर प्रदेश

पहली ही CBSE बोर्ड परीक्षा में अटल आवासीय विद्यालयों ने रचा इतिहास, 93.15% रिजल्ट, वाराणसी-प्रयागराज 100% सफल

उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी अटल आवासीय विद्यालय योजना ने अपनी पहली ही कक्षा 10 की सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में ऐतिहासिक सफलता दर्ज कर शिक्षा जगत में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। प्रदेश भर के इन विद्यालयों से कुल 2,178 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 93.15 प्रतिशत विद्यार्थी सफल घोषित किए गए।

वंचित वर्ग के बच्चों के लिए बनी उम्मीद की किरण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य निर्माण श्रमिकों और निराश्रित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराना है। इस पहल के जरिए श्रमिक परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है और उनके बच्चों के भविष्य को नई दिशा मिल रही है।

शिक्षा के साथ समग्र विकास पर फोकस

इस शानदार परिणाम के पीछे विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत और अनुशासन के साथ-साथ शिक्षकों का समर्पण और विद्यालय प्रशासन की प्रभावी कार्यप्रणाली अहम रही है। विद्यालयों में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के साथ डिजिटल शिक्षा, खेल, कौशल विकास और व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिसका सकारात्मक असर नतीजों में साफ दिखाई दे रहा है।

वाराणसी और प्रयागराज ने बनाया नया मानदंड

इस परीक्षा में वाराणसी और प्रयागराज के अटल आवासीय विद्यालयों ने 100 प्रतिशत परिणाम हासिल कर उत्कृष्टता का नया मानक स्थापित किया है। इन विद्यालयों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि उचित संसाधन और सही मार्गदर्शन मिलने पर छात्र बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

टॉपर्स ने बढ़ाया गौरव

मेधा सूची में आजमगढ़ के संगम यादव ने 97.6 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पहला स्थान हासिल किया। वाराणसी के हर्ष कुशवाहा 97.2 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि प्रयागराज के हर्षित ने 95.8 प्रतिशत अंक हासिल कर तीसरा स्थान प्राप्त किया।

इसी क्रम में आगरा के गणेश ने 95.4 प्रतिशत अंकों के साथ चौथा स्थान प्राप्त किया, जबकि मुरादाबाद के उदय प्रताप ने 95 प्रतिशत अंक हासिल कर पांचवां स्थान प्राप्त किया। इन विद्यार्थियों की उपलब्धि उनके परिश्रम, अनुशासन और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम मानी जा रही है।

90 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वालों की उल्लेखनीय संख्या

इस परीक्षा में 50 से अधिक छात्र-छात्राओं ने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए। वहीं करीब 250 विद्यार्थियों ने 80 से 90 प्रतिशत के बीच अंक प्राप्त कर विद्यालयों के उच्च शैक्षणिक स्तर को और मजबूत किया है।

संस्कृत में छात्रों का शानदार प्रदर्शन

संस्कृत विषय में भी विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। कुल 10 छात्रों ने 100 में 100 अंक हासिल किए। इनमें आगरा के गणेश कुमार, आजमगढ़ की अंशिका यादव, अलीगढ़ के सक्षम शर्मा और विकास शामिल हैं। वहीं लखनऊ के आयुष राठौर, मनीष कुमार, खुशी, अनुराग, वंशलेन्द्र गुप्ता और अरुण कुमार मौर्य ने भी संस्कृत में पूर्ण अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

मजबूत रणनीति और सतत तैयारी का असर

श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य वंचित वर्ग के बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके लिए मजबूत आधारभूत संरचना, आधुनिक शिक्षण सुविधाएं और योग्य शिक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन डॉ. एम. के. शन्मुगा सुन्दरम के अनुसार, बोर्ड परीक्षा से पहले विद्यार्थियों की तैयारी को मजबूत करने के लिए नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की गईं। इनमें आंतरिक मूल्यांकन, मॉक टेस्ट और समूह आधारित अध्ययन जैसी शैक्षणिक रणनीतियों को लागू किया गया।

महानिदेशक पूजा यादव ने बताया कि विद्यालयों में अनुशासित और सुदृढ़ शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया है, जहां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर निरंतर ध्यान दिया जाता है और प्रत्येक छात्र को अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने का अवसर दिया जाता है।

भविष्य के लिए प्रेरणा बनी सफलता

इस उपलब्धि पर सभी सफल छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यालय प्रशासन को बधाई दी गई है। यह सफलता आने वाले वर्षों में और बेहतर परिणामों के लिए प्रेरणा का काम करेगी और प्रदेश के शिक्षा परिदृश्य को नई दिशा देगी।