उत्तर प्रदेश

Agra ISBT Accident: एक ही चिता पर उठीं पति-पत्नी की अर्थियां, कंटेनर हादसे के बाद भी नहीं सुधरे हालात; ब्लैक स्पॉट पर जस की तस व्यवस्था

आगरा: आगरा के आईएसबीटी कट पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले दंपती का शनिवार को गांव में यमुना किनारे स्थित श्मशान घाट पर एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही दोनों के शव घर पहुंचे, पूरे गांव में मातम छा गया। वहीं, दो लोगों की मौत के बावजूद हादसे वाले ब्लैक स्पॉट पर यातायात व्यवस्था में कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आया।

शुक्रवार शाम करीब 6:40 बजे सिकंदरा थाना क्षेत्र के नगला छीतर गांव निवासी 41 वर्षीय अजय सिंह सिकरवार और उनकी 38 वर्षीय पत्नी पूजा देवी बाइक से जा रहे थे। आईएसबीटी कट के पास तेज रफ्तार कंटेनर ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे के बाद कंटेनर बाइक समेत दंपती को करीब 40 मीटर तक घसीटता ले गया, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

घर पहुंचते ही मचा कोहराम

शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव गांव पहुंचे तो परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। अजय सिंह के 85 वर्षीय पिता केदार सिंह, 15 वर्षीय बेटी साक्षी और 12 वर्षीय बेटी राधिका बेसुध हो गए। ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने किसी तरह परिवार को संभाला। दोपहर करीब 3:30 बजे गांव के श्मशान घाट पर एक ही चिता बनाकर पति-पत्नी का अंतिम संस्कार किया गया।

चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज

पुलिस ने हादसे के मामले में कंटेनर चालक प्रदीप कुमार निवासी नगला परमसुख, कागारौल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

दो बेटियों और बुजुर्ग पिता पर टूटा दुखों का पहाड़

इस हादसे ने पूरे परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। रिश्तेदारों के अनुसार, अजय सिंह के अलावा उनके दो भाइयों की भी कई वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। अब परिवार में केवल उनकी दो नाबालिग बेटियां और 85 वर्षीय पिता ही बचे हैं। परिजनों और ग्रामीणों को दोनों बच्चियों के भविष्य और उनके पालन-पोषण की चिंता सताने लगी है।

दो मौतों के बाद भी नहीं बदली ट्रैफिक व्यवस्था

स्थानीय लोगों के अनुसार आईएसबीटी कट लंबे समय से दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट बना हुआ है। यहां अवैध रूप से सड़क पर खड़ी होने वाली रोडवेज बसें और मेट्रो निर्माण कार्य के कारण सड़क संकरी हो जाती है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

शनिवार को भी हादसे के अगले दिन हालात में कोई विशेष बदलाव दिखाई नहीं दिया। रोडवेज बसें आईएसबीटी परिसर के भीतर जाने के बजाय सड़क किनारे खड़ी रहीं और वहीं से यात्रियों को बैठाया जाता रहा। मौके पर ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड की तैनाती जरूर रही, लेकिन अव्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी। कुछ बसों को हटाया गया, लेकिन उनके स्थान पर दूसरी बसें आकर खड़ी हो गईं, जिससे यातायात व्यवस्था फिर प्रभावित होती रही।