गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकास की नई इबारत: 12 जिलों के 519 गांवों में औद्योगिक क्रांति की तैयारी, हजारों करोड़ के निवेश से रोजगार के बड़े अवसर
उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने के साथ ही औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद तेज हो गई है। प्रदेश के सबसे लंबे इस एक्सप्रेसवे के किनारे 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। इस पहल के जरिए पूरे कॉरिडोर को इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर के रूप में विकसित करने की योजना है। इसका सीधा लाभ 12 जिलों के 519 गांवों को मिलने की संभावना है, जहां रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
करीब 47 हजार करोड़ निवेश का लक्ष्य, 987 प्रस्तावों पर काम की चुनौती
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सामने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जमीन पर उतारने की बड़ी जिम्मेदारी है। अब तक 987 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनके माध्यम से लगभग 46,660 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई गई है। इन प्रस्तावों में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, ई-कॉमर्स सप्लाई चेन और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर प्रमुख हैं।
12 जिलों में 12 औद्योगिक नोड्स, क्षेत्रीय क्षमता के अनुसार होगा विकास
आईएमएलसी योजना के तहत मेरठ से प्रयागराज तक जुड़े 12 जिलों में 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जाएंगे। हर नोड को उसकी भौगोलिक स्थिति और औद्योगिक संभावनाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, ताकि उद्योग, भंडारण और परिवहन एक साथ विकसित हो सकें।
नोड्स का विस्तार: बुलंदशहर में सबसे बड़ा क्लस्टर
गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित नोड्स में मेरठ (529 एकड़), हापुड़ (304 एकड़), बुलंदशहर (2,798 एकड़), अमरोहा (348 एकड़), संभल (591 एकड़), बदायूं (269 एकड़), शाहजहांपुर (252 एकड़), हरदोई (335 एकड़), उन्नाव (333 एकड़), रायबरेली (232 एकड़), प्रतापगढ़ (263 एकड़) और प्रयागराज (251 एकड़) शामिल हैं। इनमें बुलंदशहर सबसे बड़ा औद्योगिक क्लस्टर बनकर उभर रहा है।
हर जिले की अलग पहचान, अलग औद्योगिक संभावना
मेरठ को बेहतर कनेक्टिविटी के चलते डेटा सेंटर, वेयरहाउसिंग और स्पोर्ट्स उद्योग का बड़ा केंद्र बनने की संभावना है। हापुड़ में कृषि आधारित उद्योग और कोल्ड स्टोरेज यूनिट्स को बढ़ावा मिलेगा। बुलंदशहर, जेवर एयरपोर्ट के नजदीक होने के कारण लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन का प्रमुख हब बन सकता है।
अमरोहा के पारंपरिक हस्तशिल्प, संभल के हार्न-बोन क्राफ्ट और बदायूं में विकसित हो रही औद्योगिक टाउनशिप को इस परियोजना से नई पहचान मिलने की उम्मीद है। शाहजहांपुर में हवाई पट्टी और कौशल विकास केंद्र युवाओं को रोजगार से जोड़ेंगे, जबकि हरदोई में प्रस्तावित नॉलेज पार्क और टेक्सटाइल पार्क औद्योगिक विकास को नई दिशा देंगे।
उन्नाव, लखनऊ और कानपुर के साथ मिलकर एक मजबूत आर्थिक मॉडल के रूप में उभर रहा है, जिससे लेदर उद्योग को बड़ा लाभ मिलेगा। रायबरेली में रेलवे कोच फैक्टरी के आसपास सहायक उद्योगों का विस्तार तेज होगा। प्रतापगढ़ में आंवला आधारित एग्री-प्रोसेसिंग और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, जबकि प्रयागराज में कनेक्टिविटी बढ़ने से व्यापार, सेवाक्षेत्र और धार्मिक पर्यटन को मजबूती मिलेगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सीधा लाभ
इस पूरी परियोजना का सबसे बड़ा प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों पर देखने को मिलेगा। 519 गांवों के लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, स्थानीय उत्पादों को बाजार मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। औद्योगिक इकाइयों के साथ-साथ वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स हब बनने से रोजगार की व्यापक संभावनाएं तैयार होंगी।
