यूपी में 1 मई से शुरू होगा बड़ा राज्यव्यापी अभियान: गोआश्रय स्थलों का सघन निरीक्षण, अधिकारियों की छुट्टियों पर रोक
उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और बेहतर प्रबंधन को लेकर राज्य सरकार एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। 1 मई से 15 मई तक पूरे प्रदेश में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत गोआश्रय स्थलों पर व्यवस्थाओं को मजबूत करने और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। इस दौरान किसी भी अधिकारी की छुट्टी स्वीकृत नहीं की जाएगी और सभी स्तरों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
हर स्तर पर होगा सघन निरीक्षण और मॉनिटरिंग
यह निर्देश पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान जारी किए गए। अभियान के तहत निदेशालय से लेकर जनपद स्तर तक अधिकारी गोआश्रय स्थलों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए 18 मंडलों में नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है, जो व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत का आकलन करेंगे और पारदर्शी संचालन सुनिश्चित करेंगे।
भूसा बैंक और आत्मनिर्भरता पर विशेष फोकस
अभियान के दौरान प्रत्येक गोशाला में न्यूनतम 10 कुंतल भूसे का भंडार अनिवार्य किया गया है। स्थानीय स्तर पर किसानों से भूसा खरीदने पर जोर दिया गया है, ताकि समय पर पर्याप्त चारा उपलब्ध हो सके। इसके लिए अस्थायी गोदाम, पशु सेवा केंद्र और अन्य उपलब्ध भवनों का उपयोग भंडारण के लिए किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि पूरे वर्ष गोवंश को चारे की कमी न हो।
तकनीक, पारदर्शिता और जनभागीदारी को बढ़ावा
निरीक्षण अभियान में गोशालाओं के संचालन में पारदर्शिता, तकनीकी उपयोग और जनसहभागिता को भी प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, गोशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर रहेगा। बायोगैस प्लांट, वर्मी कम्पोस्ट और अन्य गौ-आधारित उत्पादों के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।
पशु स्वास्थ्य और प्राकृतिक खेती पर भी जोर
सरकार ने पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। दवाओं और वैक्सीन की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। बेहतर पोषण और स्वास्थ्य के आधार पर दुग्ध उत्पादन, नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रमों को गति दी जाएगी। इसके साथ ही गोवंश आधारित प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा देने की योजना है।
गोचर भूमि और रात्रि निगरानी के निर्देश
अभियान के तहत गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और वहां हरा चारा उगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही गोआश्रय स्थलों में तैनात केयरटेकर को रात्रि में वहीं रुककर व्यवस्थाओं की निगरानी करने के लिए कहा गया है, ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।
