उत्तर प्रदेश

यूपी के 22 हजार किसानों को बड़ी राहत, अब बिना फार्मर रजिस्ट्री के भी बेच सकेंगे गेहूं, चकबंदी गांवों के लिए खास व्यवस्था लागू

अमेठी। उत्तर प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद से जुड़े नियमों के बीच चकबंदी प्रक्रिया से गुजर रहे गांवों के किसानों को बड़ी राहत दी गई है। अब ऐसे किसान बिना फार्मर रजिस्ट्री के भी पुरानी व्यवस्था के तहत सरकारी क्रय केंद्रों पर अपनी उपज बेच सकेंगे। इस फैसले से जिले के करीब 22 हजार किसानों को सीधा फायदा मिलेगा, जो अब तक तकनीकी कारणों से सरकारी खरीद व्यवस्था से बाहर हो रहे थे।

जिले की 47 ग्राम पंचायतों—जैसे मंगौली, बनभरिया, सिंदुरवा, कोयलारा मुबारकपुर, महोना पूरब और रसूलपुर—में चकबंदी प्रक्रिया जारी है। इस वजह से इन गांवों के किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं बन पा रही थी, जिससे उन्हें गेहूं बेचने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी से मिली राहत

फार्मर रजिस्ट्री न होने के कारण किसान अपनी उपज सरकारी क्रय केंद्रों तक नहीं ले जा पा रहे थे। मजबूरी में उन्हें आढ़तियों के यहां औने-पौने दामों पर गेहूं बेचना पड़ रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने हस्तक्षेप किया और चकबंदी गांवों के किसानों को बड़ी राहत प्रदान की।

अब ये किसान बिना फार्मर रजिस्ट्री के भी पुरानी प्रक्रिया के तहत सरकारी क्रय केंद्रों पर अपनी उपज बेच सकेंगे, जिससे उन्हें उचित समर्थन मूल्य मिल सकेगा और आर्थिक नुकसान से बचाव होगा।

जिले में 106 क्रय केंद्रों पर हो रही खरीद

अमेठी जिले में गेहूं खरीद के लिए कुल 106 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। इनमें विपणन शाखा के 38, पीएसएफ के 20, पीसीयू के 20, यूपीएसएस के 17, भारतीय खाद्य निगम के 4, नैफेड के 5 और मंडी समिति के 2 केंद्र शामिल हैं। इन सभी केंद्रों पर 2585 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद की जा रही है।

अब तक 4850 से अधिक किसान गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री अभी तक नहीं बनी है, वे 30 अप्रैल तक इसे अनिवार्य रूप से पूरा कर लें, अन्यथा उन्हें खाद, बीज और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ सकता है।

अधिकारियों ने दी सलाह, जल्द पूरी करें रजिस्ट्री

उपकृषि निदेशक सतेंद्र कुमार ने कहा कि चकबंदी गांवों के किसानों को अस्थायी राहत दी गई है, लेकिन अन्य किसानों के लिए फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य बनी रहेगी। वहीं आरएफसी अयोध्या श्रीकृष्ण ने भी किसानों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द अपनी रजिस्ट्री पूरी कर लें, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चकबंदी प्रक्रिया में शामिल गांवों के किसानों के लिए यह निर्णय राहत भरा है और अब वे आसानी से अपनी उपज सरकारी केंद्रों पर बेच सकेंगे।