उत्तर प्रदेशलखनऊ

लखनऊ में आग का कहर: मंगल गीतों से गूंजती बस्ती पलभर में बनी राख, बारात की तैयारियों के बीच मची चीख-पुकार

राजधानी लखनऊ के विकास नगर स्थित झुग्गी बस्ती में बुधवार शाम लगी भीषण आग ने न सिर्फ सैकड़ों झोपड़ियों को जला दिया, बल्कि कई परिवारों के खुशियों से भरे पलों को भी पलभर में मातम में बदल दिया। जहां कुछ ही घंटे पहले तक मंगल गीतों की गूंज और बारात की तैयारियां चल रही थीं, वहीं अचानक उठी आग की लपटों ने पूरे माहौल को दहशत और चीख-पुकार में बदल दिया।

बारात की तैयारियों के बीच उजड़ गई खुशियां

इसी बस्ती में रहने वाले मनीष के घर में उस समय शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। घर में रिश्तेदारों की भीड़ जुटी थी, मंगल गीत गाए जा रहे थे और बारात निकलने की अंतिम तैयारी चल रही थी। दूल्हा मनीष नहाकर जैसे ही मंडप के नीचे पहुंचा, तभी अचानक आग की लपटें उठीं और कुछ ही पलों में पूरा माहौल अफरा-तफरी में बदल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झुग्गियों में रखे गैस सिलेंडर एक के बाद एक धमाकों के साथ फटने लगे, जिससे आग और भी विकराल हो गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। करीब डेढ़ घंटे बाद दमकल और पुलिस मौके पर पहुंची, जिसके बाद एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी राहत और बचाव कार्य में जुट गईं।

बारात रुक गई, शादी का सामान भी जलकर राख

बताया जा रहा है कि बारात शाम को डीके मैरिज लॉन के लिए निकलनी थी, लेकिन आग की भयावहता और राहत कार्य के चलते पूरा कार्यक्रम ठप पड़ गया। देर रात तक दमकल कर्मी आग पर काबू पाने की कोशिश करते रहे, लेकिन तब तक शादी से जुड़ा सारा सामान राख में बदल चुका था।

मनीष की चाची पूजा ने रोते हुए बताया कि आग इतनी तेज थी कि किसी को कुछ भी समझने या बचाने का मौका नहीं मिला। लोग जैसे-तैसे जान बचाकर बाहर निकले, लेकिन सिलेंडरों के धमाकों ने स्थिति और भी भयावह बना दी।

परिजनों ने दुल्हन के लिए खरीदे गए कपड़े, जेवर और अन्य जरूरी सामान निकालने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटों ने उन्हें पास तक जाने नहीं दिया। कुछ ही मिनटों में वर्षों की तैयारी और सपने सब जलकर खाक हो गए।

दो हफ्ते में बहन की शादी, अब कैसे पूरे होंगे सपने

इसी बस्ती में रहने वाली सुनीता के घर भी मातम छा गया है। उनकी बहन मनीषा की शादी 29 अप्रैल को तय थी। सुनीता ने सालों की बचत से शादी के लिए बेड, अलमारी और अन्य सामान जुटाया था, जो अब पूरी तरह जलकर राख हो चुका है। परिवार सदमे में है और यही सवाल कर रहा है कि अब शादी कैसे होगी।

बेटे का जन्मदिन बना आखिरी खुशी की याद

वहीं, करन की कहानी भी इस हादसे की त्रासदी को और गहरा कर देती है। अहमदाबाद से चार दिन पहले लौटे करन ने मंगलवार को ही अपने बेटे अर्जुन का जन्मदिन मनाया था। उन्होंने बच्चे के लिए खिलौने और उपहार लाए थे, लेकिन अब वही घर राख के ढेर में बदल चुका है। करन ने भावुक होकर कहा, “कल तक जहां केक कटा था, आज वहां सिर्फ राख है। बेटे के सारे खिलौने और हमारे सारे सपने जलकर खत्म हो गए।”