प्रयागराज हादसे में उद्यान विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर, बिना फिटनेस रिपोर्ट के शीतगृह का हुआ था नवीनीकरण
प्रयागराज। फाफामऊ के चंदापुर गांव स्थित पूर्व मंत्री अंसार अहमद के शीतगृह में अमोनिया गैस रिसाव और इमारत के एक हिस्से के ध्वस्त होने की घटना में उद्यान विभाग की गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस भयावह हादसे में चार श्रमिकों की मौत हो गई थी, जबकि 18 अन्य कामगार घायल हुए थे।
बिना वार्षिक फिटनेस रिपोर्ट के नवीनीकरण, जांच में खुलासा
हादसे के बाद गठित उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में यह साफ हुआ है कि शीतगृह के लाइसेंस का नवीनीकरण बिना वार्षिक फिटनेस रिपोर्ट के ही कर दिया गया। जांच में विभागीय स्तर पर गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई है, जिसने इस घटना को और भी चिंताजनक बना दिया है।
लापरवाही पर कार्रवाई, जिला उद्यान अधिकारी हटाए गए
मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए निलंबित जिला उद्यान अधिकारी सौरभ श्रीवास्तव को आठ दिन बाद पद से हटा दिया गया है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच रिपोर्ट के आधार पर अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
डीएम ने तत्काल गठित की थी उच्च स्तरीय कमेटी
घटना के दिन ही जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर दी थी। इस समिति में अग्निशमन विभाग, पुलिस, प्रशासन, विद्युत, श्रम विभाग (कारखाना), उद्यान विभाग, लोक निर्माण विभाग, प्रयागराज विकास प्राधिकरण और नगर निगम सहित नौ विभागों को शामिल किया गया था।
बैठक में विभागीय रिपोर्ट से खुली पोल
बुधवार शाम संगम सभागार में आयोजित बैठक में सभी विभागों की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। समग्र रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि उद्यान विभाग ने लाइसेंस जारी करने और उसके नवीनीकरण में आवश्यक सत्यापन तक नहीं किया। जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किए बिना ही लाइसेंस जारी कर दिया।
2013 से बंद शीतगृह को फिर से मिला लाइसेंस
जांच में यह भी सामने आया कि यह शीतगृह वर्ष 2013 से 2023 तक विवादों के चलते बंद था। इसके बावजूद वर्ष 2023 और 2024 में एक-एक वर्ष के लिए तथा 2025 में एक निजी इंजीनियर की रिपोर्ट के आधार पर पांच वर्ष के लिए लाइसेंस का नवीनीकरण कर दिया गया। नियमानुसार हर वर्ष फिटनेस रिपोर्ट लेना अनिवार्य था, लेकिन इसे नजरअंदाज किया गया।
जर्जर हालत में थी इमारत, फिर भी मिला नवीनीकरण
वर्ष 1993 में निर्मित इस शीतगृह की दीवारें और छत जर्जर हो चुकी थीं। हैरानी की बात यह है कि यह शीतगृह कारखाना अधिनियम के तहत पंजीकृत भी नहीं था, इसके बावजूद इसे संचालन की अनुमति दे दी गई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जल्द होगी कार्रवाई
एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह ने बताया कि अमोनिया गैस रिसाव और इमारत गिरने से हुई जनहानि के मामले में विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। बैठक में आगे की कार्रवाई को लेकर रणनीति तय की गई है और जल्द ही जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
