Monday, March 2, 2026
झारखंड

रांची में 6 साल के मासूम ने दे दी दो लोगों को नई रोशनी, परिवार ने बेटे की मौत के बाद किया नेत्रदान

रांची। रिम्स क्षेत्रीय नेत्र संस्थान में मानवता की मिसाल पेश करते हुए एक परिवार ने अपने छह वर्षीय बेटे के निधन के बाद उसका नेत्रदान कर दो जरूरतमंद लोगों को नई रोशनी दी। रिम्स आई बैंक की टीम ने तत्परता दिखाते हुए कार्निया निकालने और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया पूरी की।

घटना और नेत्रदान की प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, होचर कांके निवासी सुजीत मुंडा के छह वर्षीय बेटे का इलाज रिम्स न्यूरोसर्जरी विभाग में चल रहा था, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस कठिन समय में भी परिवार ने साहसिक कदम उठाते हुए बेटे का नेत्रदान करने का निर्णय लिया। रिम्स आई बैंक की टीम ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कीं और कार्निया को सुरक्षित आई बैंक में रखा।

दो मरीजों को मिली नई रोशनी

रिम्स नेत्र विभाग के एचओडी डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि निकाल गए दोनों कार्निया का सफल प्रत्यारोपण किया गया और अब दोनों दृष्टिहीन मरीज देख पा रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, कार्निया को मृत्यु के छह घंटे के भीतर सुरक्षित निकालना बेहद आवश्यक होता है, ताकि प्रत्यारोपण सफल हो सके।

सबसे कम उम्र का नेत्रदान और समाज के लिए संदेश

यह अभी तक का सबसे कम उम्र का नेत्रदान माना जा रहा है। बच्चे के परिवार ने कहा कि उनका बेटा भले इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसकी आंखें अब किसी और की दुनिया रोशन कर रही हैं। चिकित्सकों ने इसे समाज के लिए प्रेरक पहल बताया और अधिक से अधिक लोगों से नेत्रदान का संकल्प लेने की अपील की।