राजस्थान के जोधपुर सरकारी अस्पताल में ऑपरेशन को लेकर मचा बवाल, जांच में खुली बड़ी लापरवाही; अफवाह और हकीकत में सामने आई ये सच्चाई
राजस्थान के जोधपुर स्थित मथुरादास माथुर अस्पताल में एक बुजुर्ग महिला के ऑपरेशन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मामला उस वक्त सुर्खियों में आया जब यह चर्चा फैल गई कि डॉक्टरों ने महिला के बाएं पैर की जगह दाएं पैर का ऑपरेशन कर दिया। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए।
जांच में सामने आया कि महिला के दोनों पैरों में फ्रैक्चर था और दोनों पैरों का ऑपरेशन होना तय था। हालांकि, डॉक्टरों ने परिजनों को केवल एक पैर के ऑपरेशन की जानकारी दी थी। इसी वजह से भ्रम की स्थिति बनी और गलत पैर के ऑपरेशन की अफवाह फैल गई।
जांच कमेटी ने मानी प्रक्रिया में बड़ी चूक
मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित जांच कमेटी ने पाया कि डॉक्टरों की ओर से स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि पहले बाएं पैर का ऑपरेशन किया जाना था, लेकिन चिकित्सकों ने पहले दाएं पैर का ऑपरेशन कर दिया। इसके बाद अगले दिन बाएं पैर की सर्जरी की गई।
कमेटी ने इसे चिकित्सा प्रक्रिया में लापरवाही माना है। जांच में ऑर्थो यूनिट प्रभारी डॉ. रामकिशन चौधरी समेत ट्रॉमा ओटी में तैनात ऑर्थोपेडिक विभाग के रेजिडेंट डॉ. महेंद्र कुमार खोरवाल, डॉ. स्वास्तिक, एसआर डॉ. शांतनु जांगिड़, एनेस्थीसिया विभाग के द्वितीय वर्ष के रेजिडेंट डॉ. कपिल और नर्सिंग अधिकारी राजेंद्र राजपुरोहित की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
परिजनों को नहीं दी गई पूरी जानकारी
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी चूक यह मानी गई कि महिला के परिजनों को दोनों पैरों के ऑपरेशन की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। डॉक्टरों ने केवल बाएं पैर की सर्जरी के बारे में बताया था। इसी अधूरी सूचना के कारण अस्पताल में भ्रम की स्थिति बनी और बाद में मामला चर्चा का विषय बन गया।
हालांकि, महिला के परिवार की ओर से अस्पताल प्रशासन को कोई औपचारिक शिकायत नहीं दी गई है। परिजनों का कहना है कि दोनों पैरों का ऑपरेशन सही तरीके से हुआ और किसी पड़ोसी द्वारा गलत शिकायत किए जाने के कारण मामला बेवजह तूल पकड़ गया।
मारपीट में घायल हुई थी 66 वर्षीय महिला
अस्पताल अधीक्षक डॉ. विकास राजपुरोहित के मुताबिक, 66 वर्षीय चंपादेवी मारपीट की घटना में घायल हो गई थीं। उन्हें 22 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 27 अप्रैल को उनके दाएं पैर और 28 अप्रैल को बाएं पैर का ऑपरेशन किया गया। महिला को 30 अप्रैल को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि ऑपरेशन सही तरीके से किए गए थे, लेकिन जानकारी देने में हुई चूक और अफवाहों के कारण मामला विवाद का रूप ले बैठा।
