मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में UCC को लेकर तैयारी तेज, जिलों में होगी जनसुनवाई; आदिवासी प्रावधानों और लिव-इन नियमों पर मंथन

भोपाल: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लागू करने की दिशा में सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य सरकार द्वारा गठित समिति अब अपने कामकाज की रूपरेखा तैयार करने में जुट गई है। जानकारी के अनुसार समिति की पहली बैठक मंगलवार को दिल्ली में आयोजित होने की संभावना है।

सरकार की ओर से पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति के सदस्यों की सेवा शर्तों और कार्यप्रणाली को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेशभर में लोगों की राय जानने के लिए जिला स्तर और भोपाल में जनसुनवाई आयोजित करने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

जनता से सुझाव लेने के लिए बनेगी विशेष वेबसाइट

यूसीसी को लेकर आम लोगों की राय और सुझाव जुटाने के लिए सरकार एक विशेष वेबसाइट भी तैयार कर रही है। इस पोर्टल के जरिए नागरिक अपने सुझाव, आपत्तियां और राय ऑनलाइन दर्ज करा सकेंगे।

सूत्रों के मुताबिक समिति का कार्यालय दिल्ली में स्थापित करने की तैयारी भी चल रही है, जहां से मसौदा तैयार करने और सुझावों के विश्लेषण का काम किया जाएगा।

आदिवासी समुदाय को कुछ प्रावधानों से बाहर रखने पर विचार

मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करते हैं और उनकी सामाजिक परंपराएं एवं रीति-रिवाज लंबे समय से अलग पहचान रखते हैं। ऐसे में सरकार यूसीसी के कुछ प्रावधानों से आदिवासी समुदायों को बाहर रखने के विकल्प पर भी विचार कर रही है।

जानकारी के अनुसार उत्तराखंड और गुजरात की तर्ज पर आदिवासी परंपराओं और पारंपरिक कानूनों को संरक्षित रखने को लेकर मंथन किया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार का सामाजिक विवाद या असंतोष पैदा न हो।

लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी बन सकते हैं सख्त नियम

यूसीसी के संभावित मसौदे में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। समिति को ऐसे संबंधों के पंजीयन, अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर सुझाव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

सूत्रों की मानें तो मध्य प्रदेश सरकार इस मामले में उत्तराखंड और गुजरात की तुलना में अधिक सख्त प्रावधान लागू करने पर विचार कर सकती है।

सरकार जनमत के आधार पर आगे बढ़ाएगी प्रक्रिया

राज्य सरकार का प्रयास है कि यूसीसी को लेकर समाज के सभी वर्गों की राय ली जाए और व्यापक चर्चा के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय की जाए। इसी वजह से जिला स्तर पर जनसुनवाई और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सुझाव लेने की रणनीति बनाई गई है।

राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से अहम माने जा रहे इस मुद्दे पर अब आने वाले दिनों में प्रदेश में व्यापक बहस और चर्चा तेज होने की संभावना है।