Monsoon Alert: अलनीनो ने बढ़ाई चिंता! देश में 28% कम बारिश, महाराष्ट्र-तेलंगाना समेत कई राज्यों में सूखे जैसे हालात
नई दिल्ली: देश में मानसून की रफ्तार पर अब अलनीनो का असर दिखाई देने लगा है। केरल में समय पर दस्तक देने के बाद मानसून की गति अचानक धीमी पड़ गई है, जिससे कई राज्यों में बारिश का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जून के पहले पखवाड़े में देशभर में सामान्य से 28 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि मौसम विशेषज्ञ इसे अलनीनो के शुरुआती प्रभाव का संकेत मान रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून ने शुरुआती दिनों में अच्छी प्रगति दिखाई थी, लेकिन बाद में इसकी चाल सुस्त पड़ गई। पश्चिम भारत में मानसून पिछले एक सप्ताह से लगभग ठहरा हुआ है, जबकि पूर्वी क्षेत्रों में भी इसकी रफ्तार अपेक्षा से काफी कम बनी हुई है।
क्या है अलनीनो और क्यों बढ़ती है चिंता?
अलनीनो एक वैश्विक मौसमीय घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का सतही जल सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। भारत में अलनीनो को आमतौर पर कमजोर मानसून और कम वर्षा से जोड़कर देखा जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल अलनीनो बहुत ज्यादा प्रभावी स्थिति में नहीं है, लेकिन इसके सितंबर तक और मजबूत होने की आशंका जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो मानसून की गतिविधियों पर इसका असर और अधिक दिखाई दे सकता है।
जून में ही दिखने लगे ‘ब्रेक मानसून’ जैसे हालात
आमतौर पर जुलाई और अगस्त के दौरान कभी-कभी ‘ब्रेक मानसून’ की स्थिति बनती है, लेकिन इस बार जून में ही मानसून की सुस्ती ने मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। इसकी सबसे बड़ी वजह बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में किसी मजबूत मौसम प्रणाली का विकसित न होना माना जा रहा है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि निम्न दबाव क्षेत्र और चक्रवाती गतिविधियां मानसून को ताकत देती हैं और उसे आगे बढ़ने में मदद करती हैं। फिलहाल ऐसी कोई मजबूत प्रणाली सक्रिय नहीं होने से मानसून कमजोर पड़ा हुआ है।
तेलंगाना से महाराष्ट्र तक कम बारिश
बारिश के आंकड़े भी मानसून की सुस्ती की पुष्टि कर रहे हैं। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में सामान्य से काफी कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है। सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र में दिखाई दिया है, जहां अब तक सामान्य से लगभग 72 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।
हालांकि उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका कारण मानसून नहीं बल्कि सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ हैं।
20 जून के बाद बदल सकते हैं हालात
मौसम विभाग का मानना है कि 20 जून के बाद परिस्थितियों में सुधार की संभावना बन सकती है। बंगाल की खाड़ी में नई मौसम प्रणाली विकसित होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे मानसून को नई ताकत मिल सकती है।
यदि यह प्रणाली सक्रिय होती है तो महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में मानसून दोबारा रफ्तार पकड़ सकता है और जुलाई के पहले सप्ताह तक अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। इससे वर्तमान वर्षा घाटे की भरपाई होने की भी उम्मीद जताई जा रही है।
जुलाई-अगस्त पर टिकी उम्मीदें
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून का वास्तविक आकलन जुलाई और अगस्त के प्रदर्शन के आधार पर ही किया जाएगा, क्योंकि यही दो महीने देश में सर्वाधिक वर्षा वाले माने जाते हैं। ऐसे में फिलहाल चिंता के बावजूद उम्मीद पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
