झारखंड

गुरुजी क्रेडिट कार्ड से लोन लेना हुआ आसान, 15 लाख तक के कर्ज पर मार्जिन मनी खत्म; हेमंत कैबिनेट के 53 बड़े फैसले

रांची: झारखंड सरकार ने गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना में बड़ा बदलाव करते हुए आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए राहत दी है। अब इस योजना के तहत 15 लाख रुपये तक के सभी ऋण पर लगने वाली 5 प्रतिशत मार्जिन मनी समाप्त कर दी गई है। प्रवेश के समय छात्रों द्वारा जमा की गई पहले सेमेस्टर या वर्ष की फीस की वेब पोर्टल के माध्यम से एकमुश्त प्रतिपूर्ति भी की जाएगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में कुल 53 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

राष्ट्रीय संस्थानों में पढ़ाई के लिए भी आसान होगा कर्ज
गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की मौजूदा बाधाओं को दूर करने के लिए कई राष्ट्रीय संस्थानों को भी इसके दायरे में शामिल किया गया है। इनमें साउथ एशियन यूनिवर्सिटी, नालंदा यूनिवर्सिटी, इंडियन मेरिटाइम यूनिवर्सिटी, राजीव गांधी नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी और केंद्रीय विश्वविद्यालय शामिल हैं। इससे इन संस्थानों में उच्च शिक्षा हासिल करने के इच्छुक छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा ऋण तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है।

3,434 विद्यार्थियों को 291 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत
गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत अब तक 3,434 विद्यार्थियों के लिए 291 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया जा चुका है। इनमें से 65 करोड़ रुपये का ऋण वितरित भी किया जा चुका है। मार्जिन मनी खत्म होने से अब योजना के तहत शिक्षा ऋण लेने वाले विद्यार्थियों पर शुरुआती वित्तीय बोझ कम होगा।

10 हजार छात्रों को आठ सप्ताह की सवैतनिक इंटर्नशिप
उच्च शिक्षा में पारंपरिक ज्ञान और ग्रामीण नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए झारखंड ग्रासरूट्स इनोवेशन इंटर्नशिप योजना को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली है। इसके तहत राज्य के 10 हजार स्नातक छात्र-छात्राओं को आठ सप्ताह की सवैतनिक इंटर्नशिप दी जाएगी। इंटर्नशिप की राशि 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 12 हजार रुपये कर दी गई है। योजना को राज्य की सभी 4,345 पंचायतों तक विस्तारित किया जाएगा।

गांवों के पारंपरिक ज्ञान का तैयार होगा डिजिटल दस्तावेज
योजना के तहत छात्र ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण करेंगे और वहां मौजूद पारंपरिक ज्ञान तथा ग्रामीण नवाचारों का डिजिटल दस्तावेज तैयार करेंगे। इस पूरी योजना पर 19.33 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार ने मेंटर्स का मानदेय बढ़ाकर 30 हजार रुपये और समन्वयकों का मानदेय 80 हजार रुपये कर दिया है। उत्कृष्ट टीमों को राष्ट्रीय संस्थानों में एक्सपोजर विजिट का अवसर भी मिलेगा, जिससे छात्रों को ग्रामीण क्षेत्रों और वहां की वास्तविक परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।

4,345 पंचायतों में मिलेगी पेटेंट सहायता
राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान, नवाचार और प्री-इन्क्यूबेशन को मजबूत करने के लिए झारखंड छात्र अनुसंधान व नवाचार नीति को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत स्टेट इनोवेशन पार्क और 300 से अधिक संस्थानों में इंस्टीट्यूशन रिसर्च एंड इनोवेशन सेल स्थापित किए जाएंगे। साथ ही 4,345 पंचायतों में सामाजिक नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ग्रासरूट्स इंटर्नशिप, सीड फंडिंग, मुख्यमंत्री शोध फैलोशिप और पेटेंट सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

2030-31 तक हर साल 1,000 छात्र नवाचारों को समर्थन
नई नीति के तहत वर्ष 2030-31 तक हर साल 1,000 छात्र नवाचारों को समर्थन देने और 30,000 विद्यार्थियों को तकनीकी प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का उद्देश्य झारखंड को देश के अग्रणी नवाचार राज्यों में शामिल करना है। नीति के तहत वर्ष 2026 से 2031 तक पांच वर्षों में 1,834 करोड़ रुपये तक खर्च किए जा सकेंगे।