राज्यसभा चुनाव में बड़ा सियासी संग्राम! मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग, फैसले पर टिकी देशभर की नजर
भोपाल: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला अब बड़ा राजनीतिक और कानूनी विवाद बन गया है। कांग्रेस ने इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए सीधे भारत निर्वाचन आयोग का रुख किया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कानूनी विशेषज्ञों से जुड़े 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में चुनाव आयोग से मुलाकात कर रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को निरस्त करने की मांग उठाई है।
कांग्रेस ने फैसले को बताया कानूनी रूप से कमजोर
चुनाव आयोग के साथ बैठक के बाद कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि जिस आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किया गया है, उसका चुनावी कानून में स्पष्ट आधार नहीं है। उनका कहना है कि जिस मामले का हवाला दिया गया, उसमें न तो अदालत ने संज्ञान लिया है और न ही आरोप तय किए गए हैं। ऐसे में उसे लंबित आपराधिक मामला मानकर नामांकन रद्द करना कानून की मूल भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
नामांकन रद्द करने के आधार पर उठे सवाल
कांग्रेस का तर्क है कि चुनावी नियमों के तहत उम्मीदवार को केवल उन्हीं मामलों की जानकारी देनी होती है, जिनमें दो वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो और अदालत आरोप तय कर चुकी हो। पार्टी के मुताबिक मीनाक्षी नटराजन के मामले में ऐसी कोई स्थिति नहीं थी, इसलिए नामांकन खारिज करने का फैसला कई सवाल खड़े करता है।
चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता का मुद्दा उठाया
पार्टी ने चुनाव आयोग के सामने यह भी दलील दी कि यदि शुरुआती कानूनी प्रक्रियाओं को आधार बनाकर उम्मीदवारों के नामांकन रद्द किए जाने लगे, तो चुनावों में समान अवसर और निष्पक्षता की अवधारणा प्रभावित हो सकती है। कांग्रेस ने आयोग को पूर्व के कुछ मामलों का हवाला देते हुए कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले की समीक्षा और उसे बदलने का अधिकार आयोग के पास मौजूद है।
भोपाल से दिल्ली तक विरोध और राजनीतिक दबाव
मामले को लेकर कांग्रेस ने भोपाल में विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिया है। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सामूहिक उपवास रखकर अपना विरोध दर्ज कराया, जबकि दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व लगातार आयोग के समक्ष अपना पक्ष रख रहा है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अनुसार चुनाव आयोग ने मामले में जल्द फैसला लेने का आश्वासन दिया है।
आयोग के फैसले पर टिकी राजनीतिक निगाहें
अब पूरे मामले में चुनाव आयोग के अगले कदम का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि आयोग का निर्णय केवल मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के राजनीतिक समीकरणों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी असर डाल सकता है।
