मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में ट्रैफिक जाम से राहत की बड़ी योजना, छोटे शहरों में भी बनेंगे रिंग रोड, रतलाम से रीवा तक बदलेगा यातायात का नक्शा

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार अब बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे और उभरते शहरों में भी रिंग रोड विकसित करने की तैयारी में है। इस योजना के तहत रतलाम, देवास, सागर, सतना, रीवा और कटनी जैसे शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने और जाम की समस्या को खत्म करने पर फोकस किया जा रहा है।

छोटे शहरों में भी होगा रिंग रोड का विस्तार
राज्य सरकार की इस नई योजना का उद्देश्य केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। अब उभरते शहरों में भी रिंग रोड नेटवर्क विकसित किया जाएगा, ताकि शहरों के भीतर बढ़ते वाहनों का दबाव कम किया जा सके और यातायात सुचारू बनाया जा सके। इसके लिए स्थानीय निकायों, नगर निगमों और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के साथ मिलकर विस्तृत यातायात योजना तैयार की जा रही है।

ट्रैफिक जाम से राहत और विकास को मिलेगी रफ्तार
विशेषज्ञों के अनुसार रिंग रोड बनने से भारी वाहनों की आवाजाही शहरों के बाहर से होगी, जिससे न केवल ट्रैफिक जाम कम होगा बल्कि यात्रा समय में भी कमी आएगी। इसके साथ ही प्रदूषण में कमी और औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक्स हब और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।

जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन पर तेज काम का लक्ष्य
राज्य सरकार ने पहले से स्वीकृत जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन रिंग रोड परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है। इन परियोजनाओं को अगले डेढ़ वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है, जबकि भोपाल और इंदौर की बड़ी परियोजनाओं पर भी तेजी से काम जारी है।

भोपाल और इंदौर की बड़ी परियोजनाओं की स्थिति
भोपाल पश्चिमी बाईपास करीब 35.6 किलोमीटर लंबा है, जिस पर लगभग 4885 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। इसमें भूमि अधिग्रहण का 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसे दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
इंदौर में लगभग 139 किलोमीटर लंबी रिंग रोड परियोजना पर काम चल रहा है, जिसकी अनुमानित लागत 5900 करोड़ रुपये है। इसके पश्चिमी हिस्से का निर्माण जारी है, जबकि पूर्वी हिस्से की डीपीआर तैयार की जा रही है। इस परियोजना को 2029 तक पूरा करने की योजना है।

अन्य शहरों में भी तेज होगी परियोजनाएं
जबलपुर में 118 किलोमीटर, ग्वालियर में 29 किलोमीटर और उज्जैन में 43 किलोमीटर लंबी रिंग रोड परियोजनाओं पर निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। सरकार का दावा है कि आने वाले वर्षों में यह नेटवर्क मध्य प्रदेश के शहरों की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह बदल देगा।