पंजाब

पंजाब में भीख मांगने वाले बच्चों को मिली नई जिंदगी, 1150 बच्चे परिवार से जुड़े, 400 का स्कूलों में दाखिला

चंडीगढ़: पंजाब सरकार की जीवनजोत योजना के तहत सड़कों पर भीख मांगने वाले और परिवार से बिछड़े बच्चों के पुनर्वास की दिशा में बड़ा अभियान चलाया गया है। इस पहल के तहत अब तक करीब 1150 बच्चों को उनके परिवारों से मिलाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया गया है।

1150 बच्चों को मिला परिवार का सहारा
कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में राज्यभर से ऐसे बच्चों की पहचान की गई, जो या तो भीख मांगने को मजबूर थे या अपने परिवारों से बिछड़ गए थे। सरकार ने इन बच्चों को न केवल सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया, बल्कि उन्हें उनके परिवारों से भी मिलवाया।

400 बच्चों का स्कूलों में दाखिला
सरकारी योजना के तहत अब तक करीब 400 बच्चों को विभिन्न स्कूलों में दाखिल कराया गया है। इन बच्चों को सामान्य छात्रों की तरह शिक्षा दी जा रही है और उनकी पढ़ाई पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार इन बच्चों की उम्र अधिकतर 13 साल तक है।

डीएनए टेस्ट से हो रही पहचान की पुष्टि
परिवार से बिछड़े बच्चों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए सरकार डीएनए टेस्ट की मदद ले रही है। इसके जरिए बच्चों को उनके असली परिवारों से जोड़ने की प्रक्रिया की जा रही है। साथ ही हेल्पलाइन नंबर 1097 पर आने वाली शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।

रेस्क्यू अभियान में 2000 से ज्यादा रेड
मंत्री ने बताया कि पूरे पंजाब में अब तक 2000 से अधिक रेस्क्यू रेड की गई हैं, जिनमें बच्चों को सड़कों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। हालांकि अब तक किसी बड़े अपहरण के मामले की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हर शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

लड़कियों की संख्या भी करीब आधी
इस योजना के तहत बचाए गए बच्चों में लगभग आधी संख्या लड़कियों की है। सरकार का दावा है कि जीवनजोत-2 योजना को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और बच्चों के पुनर्वास के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास
सरकार का लक्ष्य सिर्फ बच्चों को परिवार से मिलाना ही नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा और कौशल विकास के जरिए आत्मनिर्भर बनाना भी है, ताकि वे भविष्य में सम्मानजनक जीवन जी सकें।