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हरियाणा के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, विदेश यात्रा पर लगा पूर्ण प्रतिबंध हाईकोर्ट ने किया रद्द; अनुच्छेद 21 का दिया हवाला

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार के 10 जून 2026 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर सितंबर 2026 तक पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। अदालत ने कहा कि केवल सरकारी सेवा में होने के आधार पर नागरिकों के एक पूरे वर्ग को विदेश यात्रा से रोकना स्पष्ट रूप से मनमाना है।

विदेश यात्रा को मौलिक अधिकार का हिस्सा बताया
न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ ने 27 अगस्त को दिए आदेश में राज्य के अधिकारियों को एक नर्सिंग अधिकारी को व्यावसायिक परीक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने की अनुमति देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों के अनुसार विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। याचिकाकर्ता को हरियाणा सरकार के 10 जून के निर्देश का हवाला देते हुए विदेश जाने की अनुमति नहीं दी गई थी।

सरकार ने रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट का दिया हवाला
राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि विदेश यात्रा पर रोक अस्थायी थी और रूस-यूक्रेन युद्ध तथा पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर मितव्ययिता के उपाय के तौर पर जनहित में लगाई गई थी। इसके तहत सरकारी कर्मचारियों के अलावा बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक प्राधिकरणों के कर्मचारियों को भी सितंबर 2026 तक आधिकारिक या निजी कारणों से विदेश यात्रा करने से रोका गया था। हालांकि, चिकित्सा कारणों से जरूरी विदेश यात्रा को प्रतिबंध से बाहर रखा गया था।

नर्सिंग अधिकारी को परीक्षा के लिए जाना था ऑस्ट्रेलिया
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि संबंधित नर्सिंग अधिकारी की नियुक्ति 23 फरवरी 2021 को रोहतक स्थित पीजीआईएमएस में हुई थी। इस साल जनवरी में उन्हें ऑस्ट्रेलिया के वीजा के लिए आवेदन करने की अनुमति मिली थी। निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद 29 मई को उन्हें वैध वीजा भी जारी कर दिया गया था।

व्यावसायिक परीक्षा के लिए किया था आवेदन
वकील के मुताबिक, याचिकाकर्ता ने पेशेवर अनुभव हासिल करने और उच्च योग्यता प्राप्त करने के उद्देश्य से ऑस्ट्रेलियाई स्वास्थ्य व्यवसायी विनियमन एजेंसी और राष्ट्रीय बोर्ड द्वारा आयोजित ऑब्जेक्टिव स्ट्रक्चर्ड क्लिनिकल एग्जामिनेशन के लिए आवेदन किया था। इसके बाद उन्होंने 18 अगस्त से अर्जित अवकाश के लिए आवेदन किया, लेकिन 10 जून 2026 के सरकारी निर्देशों के चलते अधिकारियों ने उनके आवेदन पर विचार नहीं किया।

अदालत ने कहा- प्रतिबंध और उद्देश्य में तर्कसंगत संबंध नहीं
उच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार विवादित निर्देशों के उद्देश्य और निजी विदेश यात्रा पर लगाए गए पूर्ण प्रतिबंध के बीच कोई तर्कसंगत संबंध स्थापित नहीं कर सकी। अदालत ने टिप्पणी की कि मौजूदा मामले में बिना पर्याप्त आधार के बात को जरूरत से ज्यादा बढ़ा दिया गया, जो संवैधानिक न्यायशास्त्र में स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि सरकार की ओर से लगाया गया पूर्ण प्रतिबंध उसके बताए गए उद्देश्य की तुलना में बेहद असंगत है।