MCD के कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स को बड़ी राहत, 30 साल की उम्र सीमा में मिलेगी छूट; 2099 शिक्षकों को फायदा
नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम के स्कूलों में लंबे समय से संविदा पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों के लिए बड़ी राहत सामने आई है। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने नियमित भर्ती में निर्धारित अधिकतम आयु सीमा को लेकर अहम आदेश दिया है। न्यायाधिकरण ने चार अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट देते हुए योग्यता के आधार पर सहायक अध्यापक (नर्सरी) (महिला) के पद पर नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया है। आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के दो महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।
लंबे अनुभव को माना महत्वपूर्ण
यह मामला उन संविदा शिक्षकों से जुड़ा था, जो कई वर्षों से एमसीडी स्कूलों में सेवाएं दे रहे थे, लेकिन नियमित भर्ती के दौरान निर्धारित 30 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके थे। न्यायिक सदस्य मनीष गर्ग और प्रशासनिक सदस्य डॉ. आनंद एस. खाती की पीठ ने पिंकी मौर्य एवं अन्य बनाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड मामले में यह आदेश दिया।
न्यायाधिकरण ने माना कि इन शिक्षकों का लंबे समय का अनुभव महत्वपूर्ण है। वे कई वर्षों से उसी श्रेणी के विद्यार्थियों को पढ़ाते आ रहे हैं, इसलिए नियमित भर्ती में उनके अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर पीठ ने आयु सीमा में छूट के लिए उन्हें पात्र माना।
चार अभ्यर्थियों को मिली राहत
अंतरिम आदेश के तहत चारों अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में अस्थायी रूप से शामिल होने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद उनके परिणाम सीलबंद लिफाफे में पीठ के समक्ष पेश किए गए। परिणामों की जांच में पिंकी मौर्य, अंजू बाला, सरोज बाला और सविता कुमारी मान ने निर्धारित कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल किए।
इसके बाद न्यायाधिकरण ने चारों के आवेदन स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों को आयु सीमा में छूट देने का निर्देश दिया। साथ ही योग्यता और भर्ती की अन्य निर्धारित शर्तें पूरी होने पर सहायक अध्यापक (नर्सरी) (महिला) के पद पर उनकी नियुक्ति पर विचार करने को कहा गया।
2099 संविदा शिक्षकों को मिल सकता है लाभ
न्यायाधिकरण के इस फैसले से एमसीडी स्कूलों में लंबे समय से संविदा आधार पर काम कर रहे 2099 शिक्षकों को लाभ मिलने की संभावना है। पीठ ने स्पष्ट किया कि चारों अभ्यर्थियों की नियुक्ति नई नियुक्ति मानी जाएगी। उनकी नियुक्ति भविष्य में उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध की जा सकती है या जरूरत पड़ने पर उनके लिए अतिरिक्त पद भी सृजित किए जा सकते हैं।
आदेश के मुताबिक संबंधित प्रक्रिया प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इससे लंबे समय से नियमित भर्ती का इंतजार कर रहे संविदा शिक्षकों के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला
न्यायाधिकरण ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के यूपीएससी बनाम डॉ. जमुना कुरुप एवं अन्य मामले के फैसले पर भी भरोसा किया। इस फैसले में आयु सीमा में छूट के उद्देश्य से संविदा पर कार्यरत एमसीडी कर्मचारियों को एमसीडी कर्मचारी माना गया था।
पीठ ने कहा कि यदि किसी भर्ती विज्ञापन में किसी विशेष लाभ को केवल स्थायी या नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं किया गया है, तो संविदा कर्मचारियों को उस लाभ से बाहर नहीं किया जा सकता।
