मध्य प्रदेश

भोपाल में BRICS संस्कृति बैठक की शुरुआत, क्रिएटिव इकोनॉमी से सांस्कृतिक विरासत तक अहम मुद्दों पर मंथन

भोपाल: ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में ब्रिक्स संस्कृति कार्य समूह की बैठक का शुभारंभ हुआ। बैठक के पहले दिन सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने तथा साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान भारत की ओर से कल्चर ट्रैक के तहत निर्धारित प्रमुख विषयों—क्रिएटिव इकोनॉमी, सांस्कृतिक एवं रचनात्मक उद्योग, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संस्कृति आधारित सतत विकास—पर प्रतिनिधिमंडलों ने अपने प्रारंभिक विचार साझा किए।

बैठक में भारत, ब्राज़ील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, ईरान, रूस और इथियोपिया के प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि मिस्र का प्रतिनिधिमंडल हाइब्रिड माध्यम से बैठक में शामिल हुआ। ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक से पहले आयोजित इस कार्य समूह की बैठक को सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने, साझा पहलों को गति देने और व्यावहारिक सहयोग के नए अवसर तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

संस्कृति केवल विरासत नहीं, विकास की प्रेरक शक्ति भी: विवेक अग्रवाल

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए संस्कृति मंत्रालय के सचिव और ब्रिक्स कल्चर वर्किंग ग्रुप के अध्यक्ष विवेक अग्रवाल ने कहा कि इस बैठक की चर्चाओं ने यह विश्वास और मजबूत किया है कि संस्कृति केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि नवाचार, लचीलेपन, समावेशी विकास और लोगों के बीच मजबूत संबंध स्थापित करने की प्रभावी शक्ति भी है।

मानव संग्रहालय में भारतीय लोक विरासत से रूबरू हुए विदेशी प्रतिनिधि

बैठक के बाद शाम को ब्रिक्स प्रतिनिधिमंडल ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय का भ्रमण किया। प्रतिनिधियों ने संग्रहालय की मुक्ताकाश प्रदर्शनियों में कुम्हार पारा, पारंपरिक तकनीकी उद्यान और हिमालयन विलेज का अवलोकन करते हुए भारत की समृद्ध लोक परंपराओं, पारंपरिक आवासों और जनजातीय जीवन शैली की सराहना की।

इस दौरान प्रतिनिधियों ने केरल की पारंपरिक धरोहर ‘आल-विलक्कु’ दीप के प्रज्वलन में भी भाग लिया। पारंपरिक लॉस्ट वैक्स तकनीक से निर्मित यह 15 फीट ऊंचा और 1,830 किलोग्राम वजनी कांस्य दीप 1001 दीप-कोटरों से सुसज्जित है, जिसे ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक माना जाता है।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दिखाई भारत की ‘विविधता में एकता’

संग्रहालय परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से भारत की “विविधता में एकता” की भावना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कथक शैली में प्रस्तुत ‘नवरस’, ‘काली स्तवन’ और ‘नर्मदा अष्टपदी’ से हुई, जिसने भारतीय शास्त्रीय कला की समृद्ध परंपरा को मंच पर जीवंत किया।

इसके बाद नागालैंड के चकेसांग नागा कलाकारों ने पारंपरिक ‘टाटी’ लोकगीतों की प्रस्तुति देकर प्रतिनिधियों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (एनआईडी मध्यप्रदेश) की विशेष रनवे प्रस्तुति ‘शिखर से तट तक’ से हुआ, जिसमें परिधानों के माध्यम से भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाया गया। इस भ्रमण और सांस्कृतिक आयोजन ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने भारत की लोक परंपराओं और सभ्यतागत विरासत की सशक्त छवि प्रस्तुत की।