900 पेज की OBC रिपोर्ट ने बढ़ाई सियासी हलचल! क्या राजस्थान में फिर नहीं मिलेगा 21% आरक्षण?
जयपुर: राजस्थान में लंबे समय से लंबित स्थानीय निकाय और पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव अब निर्णायक चरण में पहुंच गए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को बुधवार शाम ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग की 900 पेज की रिपोर्ट सौंप दी गई। रिपोर्ट मिलने के साथ ही चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता लगभग साफ हो गया है, लेकिन ओबीसी आरक्षण को लेकर एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है। संकेत हैं कि इस बार भी ओबीसी को 21 प्रतिशत आरक्षण मिलने की संभावना कम है और आरक्षण का दायरा 13 से 14 प्रतिशत के आसपास रह सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार आरक्षण का निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं किया गया है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित संवैधानिक मानकों को ध्यान में रखते हुए सिफारिशें तैयार की गई हैं।
92 ओबीसी जातियों का किया गया विस्तृत अध्ययन
राजस्थान ओबीसी राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग ने अपनी रिपोर्ट में प्रदेश की 92 ओबीसी जातियों का विस्तृत अध्ययन किया है। आयोग ने केवल आबादी के आंकड़ों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन का अलग-अलग मूल्यांकन किया है।
रिपोर्ट में आरक्षण संबंधी सिफारिशें सुप्रीम कोर्ट के ‘ट्रिपल टेस्ट’ सिद्धांत के अनुरूप तैयार की गई हैं। इसके तहत केवल आबादी अधिक होना पर्याप्त नहीं माना गया, बल्कि संबंधित वर्ग के वास्तविक राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का भी विश्लेषण किया गया।
74.85 लाख परिवारों का सर्वे, 19 मानकों पर तैयार हुई रिपोर्ट
आयोग के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त न्यायाधीश मदनलाल भाटी ने बताया कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए प्रदेशभर में व्यापक फील्ड सर्वे कराया गया। उन्होंने कहा कि 74 लाख 85 हजार ओबीसी परिवारों का सर्वे किया गया और 19 अलग-अलग बिंदुओं पर जानकारी एकत्रित की गई।
इन बिंदुओं में सामाजिक स्थिति, आर्थिक परिस्थितियां, शिक्षा, राजनीतिक भागीदारी सहित कई अन्य पहलुओं का विश्लेषण किया गया। आयोग का उद्देश्य सभी 92 ओबीसी जातियों को न्यायसंगत राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए तथ्यात्मक आधार तैयार करना था।
अब सरकार करेगी अंतिम फैसला
रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद अब अगला महत्वपूर्ण निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किन निकायों और किन वार्डों को ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय सरकार और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लिया जाएगा।
रिपोर्ट आरक्षण प्रक्रिया का आधार बनेगी, जबकि अंतिम आरक्षण सूची और वार्डों का निर्धारण सरकार करेगी। रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं, इसका फैसला भी राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में रहेगा।
एक सप्ताह में आरक्षण की लॉटरी की तैयारी
रिपोर्ट मिलने के बाद अब शहरी निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं में आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। सरकार अगले एक सप्ताह के भीतर आरक्षण की लॉटरी निकालने की तैयारी कर रही है।
इसी प्रक्रिया के तहत सामान्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित वार्डों का निर्धारण किया जाएगा। इसके पूरा होने के बाद चुनावी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच जाएंगी।
15 से 17 अगस्त के बीच जारी हो सकता है चुनाव कार्यक्रम
आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग स्थानीय निकाय चुनाव का कार्यक्रम घोषित कर सकता है। सूत्रों के अनुसार 15 से 17 अगस्त के बीच चुनाव कार्यक्रम जारी होने की संभावना है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने राजस्थान हाईकोर्ट में भी इसी समयसीमा का उल्लेख किया था। ऐसे में अब सभी की निगाहें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई प्रक्रिया
स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव में हो रही देरी पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई थी। अदालत ने ओबीसी आयोग को 5 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया था।
आयोग ने निर्धारित समयसीमा के भीतर रिपोर्ट सौंप दी है। इसके साथ ही निकाय और पंचायत चुनावों के सामने मौजूद सबसे बड़ी कानूनी बाधा लगभग समाप्त हो गई है। अब आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव कार्यक्रम की घोषणा का रास्ता खुल जाएगा। हालांकि, ओबीसी को इस बार 21 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा या सुप्रीम कोर्ट के मानकों के अनुरूप यह 13 से 14 प्रतिशत के आसपास ही रहेगा, इसका अंतिम निर्णय सरकार की अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा।
