खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मिलेगा नया बूस्ट! यूपी में 12 निवेश प्रस्तावों को मिली संस्तुति, किसानों-युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों के अनुरूप आयोजित अप्रेज़ल समिति की बैठक में 12 नए निवेश प्रस्तावों को राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति के समक्ष प्रस्तुत करने की संस्तुति दी गई है।
बैठक की अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बाबू लाल मीना ने की, जिसमें इन निवेश प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
12 निवेश प्रस्तावों को मिली मंजूरी की दिशा में बढ़त
जानकारी के अनुसार 15 जून 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर प्राप्त 12 नए निवेश प्रस्तावों की तकनीकी और विस्तृत समीक्षा के बाद सभी प्रस्तावों को आवश्यक शर्तों के साथ आगे बढ़ाने की संस्तुति दी गई है।
इन प्रस्तावों में सरसों तेल मिल विस्तार, कैटल फीड निर्माण इकाई, मूंगफली प्रसंस्करण, नमकीन एवं कन्फेक्शनरी उत्पादन, बेकरी विस्तार, कोल्ड स्टोरेज एवं फ्रोजन फूड यूनिट, मल्टीग्रेन फ्लोर मिल और सौर ऊर्जा आधारित प्रसंस्करण इकाइयों जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।
किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन पर जोर
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मार्गदर्शन में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। साथ ही स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन बढ़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
सरकार का लक्ष्य कृषि और उद्योग के बीच मजबूत समन्वय स्थापित कर प्रदेश को निवेश के लिए और अधिक आकर्षक बनाना है।
पीएमएफएमई योजना में यूपी का प्रदर्शन मजबूत
बैठक में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) की प्रगति की भी समीक्षा की गई। जानकारी के अनुसार प्रदेश में निर्धारित 31,335 लक्ष्य के मुकाबले अब तक 26,156 सूक्ष्म इकाइयों को ऋण स्वीकृति मिल चुकी है, जो कुल लक्ष्य का 83.47 प्रतिशत है।
यह उपलब्धि सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है।
प्रमुख जिलों का प्रदर्शन बेहतर
जनपदवार समीक्षा में प्रयागराज, कौशांबी, कानपुर देहात, ललितपुर और फतेहपुर जैसे जिलों ने बेहतर प्रदर्शन किया है। इन जिलों ने योजना के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।
99 प्रतिशत लक्ष्य के करीब राष्ट्रीय उपलब्धि
बैठक में यह भी बताया गया कि देशभर में पीएमएफएमई योजना के तहत 1,98,116 इकाइयों को ऋण स्वीकृति दी जा चुकी है, जो लगभग 99 प्रतिशत लक्ष्य के बराबर है। यह योजना ग्रामीण उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही है।
‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ को भी मिलेगा फायदा
सरकार का कहना है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विस्तार से ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) को भी मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग, मार्केटिंग और प्रतिस्पर्धा क्षमता में सुधार होगा।
