उत्तर प्रदेशलखनऊ

राहुल गांधी की बढ़ीं कानूनी मुश्किलें? बूलगढ़ी मानहानि मामले में जिला अदालत पहुंचा विवाद, 15 जुलाई को होगी अहम सुनवाई

हाथरस: हाथरस के चर्चित बूलगढ़ी प्रकरण से जुड़े मानहानि मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद अब मामले को जिला न्यायालय में चुनौती दी गई है। इस संबंध में दाखिल रिवीजन याचिका पर अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है।

जानकारी के अनुसार, जिला जज विनय कुमार तृतीय ने मामले को सुनवाई के लिए एडीजे पंचम विजय कुमार द्वितीय की अदालत में स्थानांतरित कर दिया है। अब इसी अदालत में रिवीजन याचिका पर आगे की सुनवाई होगी।

बूलगढ़ी प्रकरण से जुड़ा है पूरा मामला

यह मामला हाथरस जिले के चंदपा थाना क्षेत्र स्थित बूलगढ़ी गांव की वर्ष 2020 की बहुचर्चित घटना से जुड़ा हुआ है। 14 सितंबर 2020 को एक अनुसूचित जाति की युवती पर हमला हुआ था। बाद में उपचार के दौरान 29 सितंबर 2020 को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई थी। इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा बटोरी थी।

जांच के बाद केंद्रीय एजेंसी ने आरोप पत्र दाखिल किया था। बाद में अदालत ने तीन आरोपितों को बरी कर दिया, जबकि मुख्य आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

सोशल मीडिया टिप्पणी को लेकर दायर हुआ था मानहानि वाद

मानहानि विवाद की शुरुआत राहुल गांधी के दिसंबर 2024 में बूलगढ़ी गांव दौरे और उससे जुड़ी सोशल मीडिया टिप्पणी के बाद हुई। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि उनकी टिप्पणी में उन्हें सामूहिक दुष्कर्म का आरोपी बताया गया, जबकि वे अदालत से पहले ही दोषमुक्त हो चुके थे।

इसी आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि याचिका दायर की गई थी, जिसकी सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट में हुई थी।

मई में खारिज हुई थी याचिका

राहुल गांधी की ओर से अदालत में दायर आपत्ति पत्र में कहा गया था कि उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के रूप में लोकहित से जुड़े विषय पर अपनी बात रखी थी। बचाव पक्ष ने संसदीय विशेषाधिकार सहित अन्य कानूनी बिंदुओं का भी उल्लेख किया था।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश ने 14 मई को मानहानि वाद खारिज कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि संबंधित टिप्पणी का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करना नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों और घोषणाओं पर टिप्पणी करना था।

अब जिला अदालत में होगी सुनवाई

एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता पक्ष ने जिला न्यायालय में रिवीजन याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के अनुसार, मामला अब एडीजे पंचम की अदालत में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है और 15 जुलाई को इस पर अगली सुनवाई होगी।

इस सुनवाई पर अब सभी पक्षों की नजरें टिकी हैं, क्योंकि जिला अदालत का रुख इस मामले की आगे की कानूनी दिशा तय कर सकता है।