मध्यप्रदेश में सीताफल बना महिलाओं की तरक्की का सहारा, स्व-सहायता समूहों ने बदली सैकड़ों परिवारों की आर्थिक तस्वीर
भोपाल: मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में सीताफल उत्पादन और उसके प्रसंस्करण ने महिला स्व-सहायता समूहों के लिए आजीविका का मजबूत माध्यम तैयार कर दिया है। जंगलों में प्राकृतिक रूप से होने वाले सीताफल ने अब महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलने में बड़ी भूमिका निभानी शुरू कर दी है।
विशेष रूप से विवाह और मांगलिक आयोजनों में सीताफल से बने व्यंजन, खासकर सीताफल रबड़ी की बढ़ती मांग ने इस उत्पाद को नए बाजार उपलब्ध कराए हैं। मांग को देखते हुए अब ऑफ-सीजन में भी सीताफल पल्प का प्रसंस्करण कर उसकी आपूर्ति की जा रही है।
महिलाओं को मिला स्थायी रोजगार और आय का नया स्रोत
सिवनी जिले के वन क्षेत्रों में मिलने वाले सीताफल के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन का काम अब महिला स्व-सहायता समूह संभाल रहे हैं। छपारा विकासखंड के खेरमटाकोल स्थित महादेव ग्राम संगठन की अध्यक्ष अभिलाषा के अनुसार समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं को स्थायी रोजगार मिला है।
उन्होंने बताया कि महिलाएं सीताफल की पैकिंग और मार्केटिंग के जरिए हर साल अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। यहां तैयार उत्पादों की सप्लाई स्थानीय बाजारों के साथ-साथ मध्यप्रदेश के बड़े शहरों और छत्तीसगढ़ तक की जा रही है।
सिवनी के सीताफल की मिठास और गुणवत्ता के कारण इसकी मांग अब राष्ट्रीय स्तर पर भी तेजी से बढ़ रही है।
महिलाएं कमा रहीं सालाना डेढ़ लाख रुपये तक
बरोड़ा सिवनी विकासखंड के मां दुर्गा महिला आजीविका ग्राम संगठन की अध्यक्ष रामप्यारी ने बताया कि सीताफल आधारित गतिविधियों से महिलाओं की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आया है।
उन्होंने कहा कि समूह से जुड़ी महिलाएं प्रतिवर्ष एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनके परिवारों का जीवन स्तर बेहतर हुआ है।
13 समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं को मिला रोजगार
आजीविका मिशन के तहत छपारा विकासखंड में 13 स्व-सहायता समूहों से जुड़ी सैकड़ों महिलाओं को रोजगार मिला है। शुरुआती चरण में 200 से अधिक महिलाओं को सीधे तौर पर काम उपलब्ध कराया गया।
महिला समूहों को ग्रेडिंग, पैकेजिंग, प्रसंस्करण और विपणन का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार पहुंच दोनों में सुधार हुआ है।
जिला परियोजना प्रबंधक संजय रस्तोगी ने बताया कि सिवनी का सीताफल प्राकृतिक रूप से बेहद स्वादिष्ट और मीठा होता है। इसी वजह से इसे “एक जिला एक उत्पाद” योजना में भी शामिल किया गया है, जिससे इसकी अलग पहचान बनी है।
ऑफ-सीजन में भी उपलब्ध रहेगा सीताफल पल्प
बढ़ती मांग को देखते हुए जिले में दो प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की गई हैं, जहां सीताफल के गूदे यानी पल्प को कम तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है।
इस व्यवस्था से पूरे साल सीताफल आधारित उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है और बड़े आयोजनों की मांग भी आसानी से पूरी की जा रही है।
सिवनी बन रहा आत्मनिर्भर आजीविका मॉडल
एसआरएलएम भोपाल के राज्य परियोजना प्रबंधक (कृषि) मनीष पंवार ने कहा कि सिवनी जिले की महिलाएं स्व-सहायता समूहों के जरिए आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय काम कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि जिले की अनुकूल जलवायु के कारण यहां उत्पादित सीताफल की गुणवत्ता बेहद उत्कृष्ट है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। सिवनी अब आजीविका संवर्धन और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक सफल मॉडल के रूप में उभर रहा है।
