उत्तराखंड चुनाव से पहले सनातन पर सियासी संग्राम तेज, केदारनाथ और बदरीनाथ सीटों पर भाजपा-कांग्रेस की रणनीतिक भिड़ंत
देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म होता नजर आ रहा है। बंगाल और असम में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद अब उत्तराखंड में भी सनातन और धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति तैयार होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार सत्ताधारी भाजपा इस बार चारधाम और सनातन आस्था से जुड़े मुद्दों को चुनावी अभियान का प्रमुख आधार बनाने की तैयारी में है। खास तौर पर केदारनाथ और बदरीनाथ विधानसभा सीटों पर दोनों प्रमुख दलों की पैनी नजर बनी हुई है।
चारधाम और सनातन मुद्दे पर फोकस में भाजपा
भाजपा की रणनीति में उत्तराखंड के चारधाम और प्रमुख धार्मिक स्थलों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। पार्टी का फोकस केदारनाथ और बदरीनाथ जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से अहम विधानसभा क्षेत्रों पर जीत सुनिश्चित करने पर है।
वर्तमान में केदारनाथ सीट भाजपा के पास है, जबकि बदरीनाथ सीट पर कांग्रेस का कब्जा है। भाजपा इन दोनों सीटों को जीतकर राज्य में मजबूत राजनीतिक संदेश देने की कोशिश में है।
प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड से गहरा जुड़ाव
उत्तराखंड को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष लगाव किसी से छिपा नहीं है। केदारनाथ क्षेत्र को उनकी आध्यात्मिक साधना स्थली के रूप में भी देखा जाता है। वर्ष 2014 के बाद से प्रधानमंत्री मोदी लगातार उत्तराखंड और चारधाम को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों में जुटे हैं।
केदारनाथ पुनर्निर्माण परियोजना से लेकर बदरीनाथ को ‘स्प्रिचुअल हिल सिटी’ के रूप में विकसित करने की योजना तक, केंद्र सरकार की कई परियोजनाएं इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
चारधाम विकास परियोजनाओं पर केंद्र का जोर
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और चारधाम ऑल वेदर रोड शामिल हैं, जिनका उद्देश्य उत्तराखंड को पूरे वर्ष सुगम कनेक्टिविटी देना है।
इन योजनाओं को उत्तराखंड को ‘आध्यात्मिक राजधानी’ के रूप में विकसित करने की दीर्घकालिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
केदारनाथ-बदरीनाथ सीट पर सियासी टक्कर तय
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक आगामी चुनाव में केदारनाथ और बदरीनाथ विधानसभा सीटें हाई प्रोफाइल मुकाबले का केंद्र बन सकती हैं।
भाजपा जहां केदारनाथ सीट को अपने पास बनाए रखने और बदरीनाथ पर कब्जा जमाने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं कांग्रेस दोनों सीटों पर मजबूत चुनौती पेश करने की तैयारी में है।
कांग्रेस की रणनीति के तहत इन धार्मिक सीटों के जरिए भाजपा के सनातन एजेंडे को राजनीतिक रूप से चुनौती देने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस भी बना रही मजबूत रणनीति
कांग्रेस ने भी इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों पर खास फोकस करना शुरू कर दिया है। प्रदेश प्रभारी के हालिया उत्तराखंड दौरे में चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों को प्राथमिकता दी गई।
पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर तैयारी तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
आगामी चुनाव में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों का महासंग्राम
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तराखंड का आगामी विधानसभा चुनाव केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, विकास और राजनीतिक रणनीति का बड़ा महासंग्राम बनने जा रहा है।
जहां भाजपा सनातन और विकास के मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस इसे राजनीतिक रूप से चुनौती देने की रणनीति पर काम कर रही है।
