रेल यात्रियों की शिकायतों पर अब होगी सख्त निगरानी, रियल टाइम मॉनिटरिंग से ट्रेनों की गुणवत्ता सुधारने की बड़ी तैयारी
समस्तीपुर। रेलवे अब यात्रियों की शिकायतों को केवल दर्ज करने तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि इन्हें सेवा सुधार का मुख्य आधार बनाया जाएगा। इसी दिशा में रेल मदद पोर्टल पर मिलने वाली शिकायतों के गहन विश्लेषण के आधार पर ट्रेनों की गुणवत्ता की समीक्षा और सुधार के लिए नई व्यवस्था जल्द लागू होने जा रही है। इस कदम का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देना और बार-बार सामने आ रही समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है।
सबसे खराब ट्रेनों पर रेलवे बोर्ड की सीधी नजर
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक जोनल रेलवे की दस सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली ट्रेनों की पहचान कर उनकी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। वहीं, जिन ट्रेनों में 15 से अधिक शिकायतें दर्ज होंगी, उनकी जांच सीधे रेलवे बोर्ड स्तर पर की जाएगी। इससे खराब प्रदर्शन करने वाली ट्रेनों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
रेल मदद में समस्तीपुर मंडल का प्रदर्शन सराहनीय
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान रेल मदद पोर्टल पर शिकायतों के निपटारे में पूर्व मध्य रेल के अंतर्गत समस्तीपुर मंडल ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। मंडल को कुल 23,398 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनका समयबद्ध समाधान किया गया। इनमें से 14,028 यात्रियों ने फीडबैक दिया, जिसमें 9,306 ने उत्कृष्ट और 3,605 ने संतोषजनक रेटिंग प्रदान की। असंतोषजनक फीडबैक का प्रतिशत केवल 7.96 रहा।
राष्ट्रीय स्तर पर 10वां स्थान, फिर भी सुधार की गुंजाइश
प्रदर्शन के आधार पर समस्तीपुर मंडल को भारतीय रेलवे में 10वां स्थान मिला है। हालांकि यह पिछले वर्ष की तुलना में पांच स्थान नीचे है, लेकिन शिकायत निपटारे की गति और पारदर्शिता के लिहाज से इसे सकारात्मक प्रदर्शन माना जा रहा है।
गर्मी में बढ़ीं शिकायतें, कूलिंग और सफाई बड़ी चुनौती
गर्मी के मौसम में ट्रेनों में कूलिंग सिस्टम की खराबी, बिजली उपकरणों में गड़बड़ी, कोच और शौचालयों की सफाई से जुड़ी शिकायतें सबसे अधिक सामने आ रही हैं। इसके अलावा गंदा बेडरोल, खानपान की खराब गुणवत्ता, ओवरचार्जिंग और पीने के पानी की अनुपलब्धता जैसी समस्याएं भी यात्रियों को परेशान कर रही हैं।
जवाबदेही तय करने पर रेलवे बोर्ड का जोर
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायतों के मूल कारणों की पहचान कर मंडल, डिपो और मुख्यालय स्तर पर सुधारात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही खराब प्रदर्शन करने वाली ट्रेनों और कोचिंग डिपो की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत हो सके।
तकनीकी निगरानी और कोच फिटनेस पर विशेष फोकस
नई व्यवस्था में यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि सभी कोच पूरी तरह फिट रहें और सभी उपकरण सुचारू रूप से कार्य करें। पावरकार और एसी सिस्टम की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी और प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एसी कोच में तापमान नियंत्रण को प्राथमिकता दी जाएगी।
लंबी दूरी की ट्रेनों में निर्बाध सेवा पर जोर
48 घंटे से अधिक यात्रा करने वाली ट्रेनों में द्वितीयक रखरखाव और बिजली आपूर्ति को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। मार्ग में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
