उत्तर प्रदेश

LPG संकट पर सियासी घमासान, अखिलेश यादव और केशव मौर्य के बीच तीखा वार-पलटवार

लखनऊ में एलपीजी संकट को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बीच इस मुद्दे पर जुबानी जंग खुलकर सामने आई है। दोनों नेताओं के बयान अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गए हैं।

चूल्हे वाले बयान से शुरू हुआ विवाद

दरअसल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हाल ही में अपने घर में मिट्टी के चूल्हे बनवाने की बात कही थी, जिसे लेकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि जिनके घर में गैस सिलेंडर नहीं है, वे सूचना दें, सरकार उनकी मदद करेगी और सिलेंडर भिजवाएगी।

अखिलेश का पलटवार— भाजपाई ही कर रहे कालाबाजारी

उपमुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस बयान से साफ हो गया है कि सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी भाजपा से जुड़े लोग ही कर रहे हैं। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि डिप्टी सीएम अपना फोन नंबर सार्वजनिक करें या फिर अपने घर, कार्यालय या कथित ‘अंडरग्राउंड गोदाम’ का पता ही बता दें।

भाजपा पर सवालों की बौछार

पार्टी की ओर से जारी बयान में अखिलेश यादव ने भाजपा और उसके कार्यकर्ताओं पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो पार्टी खुद को दुनिया की सबसे बड़ी और सेवा करने वाली पार्टी बताती है, वह इस संकट के समय नजर क्यों नहीं आ रही है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि भाजपा कार्यकर्ता गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर लोगों की मदद के लिए क्यों नहीं पहुंच रहे हैं।

‘आपदा में अवसर’ पर भी साधा निशाना

अखिलेश यादव ने भाजपा के ‘आपदा में अवसर’ वाले नारे पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि इसकी एक पूरी रणनीति होती है— पहले लोगों को परेशानी में डालो, फिर संकट का माहौल बनाओ, डर पैदा करो, कमी बढ़ाओ और लंबी लाइनें लगवाओ। इसके बाद पीछे के रास्ते से सप्लाई कर कालाबाजारी के जरिए मुनाफा कमाया जाता है।

संकट पर सियासत तेज, जनता के बीच बढ़ी चिंता

एलपीजी की किल्लत के बीच सियासी बयानबाजी ने माहौल और गरमा दिया है। जहां एक ओर विपक्ष सरकार पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार की ओर से राहत और आपूर्ति के दावे किए जा रहे हैं। इस बीच आम लोगों की परेशानी और चिंता लगातार बनी हुई है।