हिमाचल की विधवा महिलाओं की बेटियों को बड़ी राहत: हाई एजुकेशन के लिए मिलेगी आर्थिक मदद, CM सुक्खू का ऐलान
शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार ने इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना का दायरा बढ़ाते हुए बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश की विधवा महिलाओं की बेटियों को राज्य के भीतर ही नहीं, बल्कि प्रदेश से बाहर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाएगी। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य कमजोर वर्गों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में मजबूती देना है।
27 वर्ष की आयु तक मिलेगा योजना का लाभ
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शिमला में जारी बयान में बताया कि इस योजना के तहत पात्र बेटियों को 27 वर्ष की आयु तक सहायता प्रदान की जाएगी। योजना का मकसद विधवा, निराश्रित या तलाकशुदा महिलाओं तथा दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में सहयोग देना है, ताकि वे आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई से वंचित न रहें।
वित्त वर्ष में 31.01 करोड़ का प्रावधान
राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष में इस योजना के लिए 31.01 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है। तीन फरवरी 2026 तक 22.96 करोड़ रुपये पहले ही व्यय किए जा चुके हैं। यह दर्शाता है कि सरकार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दे रही है।
राज्य से बाहर पढ़ने वाली छात्राओं को विशेष सहायता
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई पात्र छात्रा राज्य से बाहर स्थित सरकारी संस्थान में व्यावसायिक पाठ्यक्रम कर रही है और उसे सरकारी छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो उसे किराया या पीजी आवास शुल्क के लिए अधिकतम 10 महीनों तक प्रति माह 3,000 रुपये की सहायता दी जाएगी।
किन-किन पाठ्यक्रमों को मिलेगा लाभ
योजना के तहत इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, व्यवसाय एवं प्रबंधन, चिकित्सा एवं संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान, विधि (ला), कंप्यूटर एप्लीकेशन और आईटी सर्टिफिकेशन, एजुकेशन एवं ह्यूमैनिटीज, राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद के पाठ्यक्रम, शिल्पकार प्रशिक्षण योजना और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कार्यक्रम शामिल किए गए हैं।
पहले से मिल रही है 18 वर्ष तक सहायता
वर्तमान में योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को 18 वर्ष की आयु तक मासिक वित्तीय सहायता दी जा रही है। साथ ही राज्य के सरकारी संस्थानों में अध्ययनरत लाभार्थियों की ट्यूशन फीस, छात्रावास शुल्क और अन्य शैक्षणिक व्यय भी सरकार द्वारा वहन किए जा रहे हैं।
यह निर्णय उन परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जहां आर्थिक सीमाओं के कारण बेटियों की उच्च शिक्षा प्रभावित होती है।
