राज्यपाल संतोष गंगवार ने ISM में वसंतोत्सव का किया शुभारंभ, क्रिटिकल मिनरल्स और आत्मनिर्भर भारत पर दिया विशेष जोर
धनबाद। झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि आईआईटी आईएसएम में आयोजित उद्योग–संस्थान इंटरैक्शन कार्यक्रम राष्ट्रीय विकास को समर्पित ज्ञान, शोध और उद्योग के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आईएसएम ने एक शताब्दी से अधिक समय तक राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। राज्यपाल ने बतौर मुख्य अतिथि आईआईटी आईएसएम में वसंतोत्सव समारोह का विधिवत शुभारंभ किया।
खनन, भूविज्ञान और ऊर्जा क्षेत्र में ISM का ऐतिहासिक योगदान
राज्यपाल ने कहा कि खनन, भूविज्ञान और ऊर्जा के क्षेत्र में आईएसएम का योगदान देश के औद्योगिक विकास की मजबूत आधारशिला रहा है। ऐसे समय में स्मार्ट माइनिंग और क्रिटिकल मिनरल्स की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्य के लिए यह विषय विशेष रूप से प्रासंगिक है।
पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदाय के साथ विकास की जरूरत
राज्यपाल संतोष गंगवार ने जोर देते हुए कहा कि खनिज संसाधनों के दोहन के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों को साथ लेकर आगे बढ़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधन केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय प्रगति के भी प्रमुख स्तंभ हैं।
खनिज संपदा से मजबूत होती है देश की आधारभूत संरचना
उन्होंने बताया कि झारखंड का कोयला, लोहा, बॉक्साइट और अन्य खनिज देश की आधारभूत संरचना, ऊर्जा उत्पादन और विभिन्न विनिर्माण क्षेत्रों को मजबूती प्रदान करते हैं। इन संसाधनों का संतुलित और जिम्मेदार उपयोग देश के दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक है।
श्रम सुधारों से उद्योग और श्रमिकों में संतुलन
राज्यपाल ने कहा कि कुछ माह पूर्व देश में श्रम क्षेत्र में व्यापक सुधार करते हुए नई श्रम संहिताओं को लागू किया गया है। इनका उद्देश्य श्रमिकों को बेहतर वेतन, सुरक्षित कार्य परिस्थितियां, सामाजिक सुरक्षा और समग्र कल्याण प्रदान करना है। यह कदम उद्योगों की प्रगति और श्रमिक हितों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 की ओर देश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज भारत आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर नए संकल्प और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। इस दिशा में स्वच्छ ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स और स्वदेशी तकनीक की निर्णायक भूमिका है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास में क्रिटिकल मिनरल्स अहम
उन्होंने कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स न केवल आर्थिक विकास बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और रक्षा उत्पादन जैसी आधुनिक तकनीकों का आधार यही खनिज हैं। इन क्षेत्रों में नवाचार, अनुसंधान और स्वदेशी उत्पादन क्षमता को और मजबूत करना समय की मांग है।
शिक्षण संस्थान और युवाओं की भूमिका सबसे अहम
राज्यपाल ने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षण संस्थानों और युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब ज्ञान के साथ राष्ट्र निर्माण का भाव जुड़ता है, तब प्रतिभा समाज और प्रगति का सशक्त माध्यम बनती है।
भारत की आर्थिक उड़ान का किया उल्लेख
राज्यपाल ने कहा कि आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और शीघ्र ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। डिजिटल भुगतान, स्टार्टअप, अंतरिक्ष, रक्षा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है, जो युवाओं की प्रतिभा, तकनीक और नवाचार का परिणाम है।
देश को नई दिशा देंगे इस मंच से निकले विचार
उन्होंने विश्वास जताया कि यह कार्यक्रम केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां से निकलने वाले विचार और संकल्प देश को नई गति देंगे और आत्मनिर्भर भारत व सशक्त भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान करेंगे।
