मध्य प्रदेश के बालाघाट के युवक प्रसन्नजीत रंगारी पाकिस्तान की जेल से 7 साल बाद रिहा, बहन घर लाने में कर रही मदद की गुहार
बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के प्रसन्नजीत रंगारी सात साल तक पाकिस्तान की जेल में बंद रहने के बाद आखिरकार 31 जनवरी को रिहा हुए। मानसिक बीमारी के चलते भटकते हुए वे 2019 में गलती से सरहद पार कर गए थे और वहां सुनील अदे के नाम से जेल में बंद थे। रिहाई की प्रक्रिया आसान नहीं थी; सात साल तक उनकी बहन संघमित्रा ने सरकारी दफ्तरों, नेताओं और प्रशासन के दरवाजे खटखटाए।
शिक्षा और संघर्ष
खैरलांजी के निवासी प्रसन्नजीत पढ़ाई में तेज थे। पिता लोपचंद रंगारी ने कर्ज लेकर उन्हें जबलपुर के गुरु रामदास खालसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बी-फार्मेसी की पढ़ाई करवाई और 2011 में एम.पी. स्टेट फार्मेसी काउंसिल में उनका रजिस्ट्रेशन हुआ। मानसिक स्थिति बिगड़ने के बाद वे 2017-18 में घर से लापता हो गए। परिवार ने उन्हें लंबे समय तक तलाशा और अंततः मृत मान लिया।
पाकिस्तान में गिरफ्तारी और रिहाई
दिसंबर 2021 में परिवार को पता चला कि प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल में हैं। 1 अक्टूबर 2019 को उन्हें बाटापुर से हिरासत में लिया गया था। 31 जनवरी को पाकिस्तान ने सात भारतीय नागरिकों को रिहा किया, जिन्हें अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीएसएफ के हवाले किया गया। प्रसन्नजीत फिलहाल अमृतसर के रेड क्रॉस भवन और गुरु नानक देव अस्पताल में हैं, जहां उनकी देखरेख एएसआई जसविंदर सिंह कर रहे हैं।
बहन की उम्मीद और मदद की गुहार
1 फरवरी को संघमित्रा ने अपने भाई से सात साल बाद पहली बार फोन पर बात की। प्रसन्नजीत ने कहा, “मेरे पास टिकट नहीं है, तुम ही मुझे लेने आओ।” परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और अब बहन घर तक भाई को लाने के लिए मदद की गुहार लगा रही है। पिता लोपचंद रंगारी का निधन वेरिफिकेशन दस्तावेज आने के दिन ही हो गया था। अब परिवार की आशा है कि मां अपने बेटे को सालों बाद गले लगा पाएंगी।
