छत्तीसगढ़ में जल संकट के बीच हैरान करने वाली घटना: पालतू तोते को उतारने के लिए बहाया गया पूरा पानी का टैंकर, फायर ब्रिगेड की भूमिका पर उठे सवाल
नारायणपुर। देशभर में भीषण गर्मी और पानी की किल्लत के बीच छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने आम लोगों में नाराजगी बढ़ा दी है। यहां एक पालतू तोते को पेड़ से नीचे उतारने के लिए फायर ब्रिगेड की मदद ली गई और इस दौरान हजारों लीटर पानी बहा दिया गया, जबकि क्षेत्र पहले से ही जल संकट का सामना कर रहा है।
पेड़ पर फंसे तोते को उतारने के लिए चला वाटर कैनन
जानकारी के मुताबिक, यह घटना शहर के ओबीसी बॉयज हॉस्टल के पास की है। एक व्यक्ति का पालतू तोता पिंजरे से उड़कर एक ऊंचे पेड़ पर जा बैठा। काफी प्रयासों के बावजूद जब वह नीचे नहीं उतरा तो मालिक ने फायर ब्रिगेड को बुला लिया। मौके पर पहुंची टीम ने तोते को नीचे उतारने के लिए पेड़ पर पानी की तेज धार डालनी शुरू कर दी। लगातार पानी पड़ने से तोता वहां से उड़कर पास की एक इमारत की छत पर जा बैठा, जहां बाद में उसे पकड़ लिया गया।
वीडियो वायरल, लोगों में गुस्सा और कई सवाल
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि जहां आम हालात में फायर ब्रिगेड समय पर नहीं पहुंचती, वहां एक तोते के लिए तुरंत कैसे पहुंच गई। साथ ही, भीषण गर्मी के दौर में जब लोगों को पीने का पानी भी मुश्किल से मिल रहा है, तब इस तरह हजारों लीटर पानी की बर्बादी को लेकर भी नाराजगी जताई जा रही है।
आपातकालीन सेवाओं के दुरुपयोग का आरोप
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि यदि उसी समय शहर में कहीं आग लग जाती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता। इस घटना को आपातकालीन सेवाओं के दुरुपयोग के रूप में देखा जा रहा है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
‘बड़े अधिकारी का था तोता’, जांच की उठी मांग
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह तोता एक बड़े अधिकारी का बताया जा रहा है और इसी प्रभाव के चलते फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। इस मामले को लेकर स्थानीय कांग्रेसी पार्षद जय वट्टी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए इसे गैर जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि आम जनता को जरूरत पड़ने पर सेवाएं नहीं मिलतीं, लेकिन एक पक्षी के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।
कड़ी कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच की मांग
पार्षद ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इसे सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती हैं और इन पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए।
